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जी-आठ में 'खुले' ऊर्जा बाज़ार का समर्थन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस में हो रहे जी-आठ सम्मेलन में नेताओं ने ‘खुले और पारदर्शी’ ऊर्जा बाज़ार की वकालत की है. जी-आठ देशों के नेताओं ने ऊर्जा चार्टर को अपना समर्थन दिया है. इस चार्टर में ऊर्जा स्रोतों तक पहुँच आसान बनाने की बात की गई है. परमाणु ऊर्जा में रुचि दिखाने वाले देशों तक इसकी पहुँच आसान बनाने की भी बात जी-आठ देशों ने की है. लेकिन रूस ने ऊर्जा चार्टर का अनुमोदन नहीं किया है. यूरोपीय संघ और अमरीका रूस से इस चार्टर का अनुमोदन करने और ऊर्जा के मामले पर बेहतर अंतरराष्ट्रीय तालमेल बनाने का आग्रह करते रहे हैं. कई देशों में आशंका जताई जा रही थी कि रूस ऊर्जा का इस्तेमाल अपनी विदेश नीति के एक हथियार के तौर पर कर सकता है. जी-आठ देशों के बयान में कहा गया है, "लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने और लोगों के लिए नए मौके पैदा करने में ऊर्जा बेहद ज़रूरी है." पिछले कई महीनों से तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती रही है और ये बयान इसी के बाद आया है. इसराइल-लेबनान विवाद के बाद तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़ी हैं. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के एक सर्वेक्षण के मुताबिक 19 देशों के बीस हज़ार लोगों में से औसतन 45 फ़ीसदी लोग रूस को ऊर्जा सप्लाई करने के मामले में भरोसेमंद मानते हैं. कई जी-आठ देश परमाणु ऊर्जा के विकल्प के बारे में भी सोच रहे हैं. हालांकि जर्मनी इसके ख़िलाफ़ है. | इससे जुड़ी ख़बरें मध्य पूर्व विवाद पर मत विभाजित16 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना क्या है हिज़्बुल्ला संगठन?16 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना हमले रोकने के लिए इसराइल की शर्त14 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना लेबनानी प्रधानमंत्री ने की अपील 15 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना बुश-पुतिन में सहमति नहीं बनी15 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना सेंट पीटर्सबर्ग में जी आठ सम्मेलन शुरु16 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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