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मंगलवार, 04 जुलाई, 2006 को 12:13 GMT तक के समाचार
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इराक़ी बिजली उपमंत्री का अपहरण
ख़लीज़ाद और इराक़ी प्रधानमंत्री
पिछले कुछ दिनों में इराक़ी राजनेताओं के अपहरण की ये दूसरी घटना है.
इराक़ की राजधानी बग़दाद में मंगलवार को बिजली उपमंत्री राद अल हारिस का उनके 19 अंगरक्षकों के साथ अपहरण कर लिया गया है.

पुलिस का कहना है कि बिजली उपमंत्री के क़ाफ़िले को सात वाहनों ने रोका और उन लोगों को उतार कर कारों में जबरन सवार करा दिया गया.

जिस समय मंत्री को अगवा किया गया, उस वक़्त वे शिया बहुल इलाक़े तालबियाह से गुज़र रहे थे.

एक प्रत्यक्षदर्शी अहमद हसन ने बताया, "हम गली में खड़े थे जब कुछ कारें आईं, बंदूकधारी बाहर निकले और कई लोगों को अगवा कर लिया."

पिछले चार दिनों में इराक़ी राजनेताओं के अपहरण की ये दूसरी घटना है. शनिवार को एक महिला सांसद और सात सुरक्षाकर्मियों को अगवा कर लिया गया था.

सुरक्षाकर्मी बिजली उपमंत्री के अपहरण के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दे पा रहे हैं. लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री के अंगरक्षकों ने अपहरणकर्ताओं से जूझने की कोशिश नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि ये एक आधिकारिक अभियान है.

मंत्री का अपहरण

ख़लीज़ाद और इराक़ी प्रधानमंत्री ने ज़रक़ावी की मौत का ऐलान किया था

उधर इराक़ में अमरीकी राजदूत ज़ल्मै ख़लीलज़ाद ने कहा है कि पिछले महीने चरमपंथी नेता अबू मुसाव अल ज़रक़ावी की मौत से हिंसा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.

लेकिन उनका कहना था कि इससे कुछ विद्रोही गुटों को सरकार की तालमेल संबंधी बातचीत में शामिल होने की प्रेरणा ज़रूर मिली है.

ख़लीलज़ाद ने यह बात स्वीकार की कि इराक़ में हालात मुश्किल हैं लेकिन उन्होंने कहा कि अमरीका के पास इसके सिवाय और कोई विकल्प नहीं है कि वह डटा रहे.अमरीकी स्वतंत्रता दिवस पर बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में ख़लीलज़ाद ने कहा था कि ज़रक़ावी की हत्या से अन्य विद्रोही गुटों तक पहुँचने का मौक़ा मिला है क्योंकि यह गुट ज़रक़ावी से ख़ौफ़ खाते थे.

लेकिन दूसरी ओर, हिंसा की घटनाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा, "जैसा आप जानते हैं, हिंसा का स्तर बहुत ऊँचा है".

 हम जानना चाहते हैं कि वे कौन से गुट हैं जो बाहर आना चाहते हैं. वे कौन हैं, उनकी क्या क्षमताएँ हैं, उनका कहाँ नियंत्रण है. ताकि यह भरोसा बढ़ सके कि ये लोग हैं जो कुछ कर सकते हैं और हालात पर असर डाल सकते हैं.
ज़ल्मै ख़लीलज़ाद

ज़ल्मै ख़लीलज़ाद ने कहा कि विद्रोही गुटों और इराक़ी और अमरीकी अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है.

उन्होंने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि वे कौन से गुट हैं जो बाहर आना चाहते हैं. वे कौन हैं, उनकी क्या क्षमताएँ हैं, उनका कहाँ नियंत्रण है. ताकि यह भरोसा बढ़ सके कि ये लोग हैं जो कुछ कर सकते हैं और हालात पर असर डाल सकते हैं".

उनका कहना था कि पिछले कुछ दिनों में सामने आए अमरीकी सैनिकों की क्रूरताओं के आरोप दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

उन्होंने कहा कि हर आरोप की पूरी जाँच कराई गई है लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अधिकतर अमरीकी सैनिक बेहतरीन काम कर रहे हैं.

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