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ईरान को पैकेज देने पर सहमति
ईरान का परमाणु संयंत्र
ईरान पर उसके सैन्य परमाणु कार्यक्रम को बंद करने का दबाव है
दुनिया के छह प्रमुख देश ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम बंद करने के एवज में एक पैकेज देने पर सहमत हो गए हैं. ईरान के प्रस्ताव न मानने पर कड़े दंड़ पर भी सहमति हुई है.

इस सहमति की वियना में घोषणा करते हुए ब्रिटेन की विदेश मंत्री मार्गरेट बैकेट ने कहा कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे और ईरान को बातचीत के माध्यम से समझौते पर पहुँचने का एक और मौक़ा मिलेगा.

उन्होंने कहा कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता है तो अगले क़दम उठाए जाएँगे.

ब्रिटेन की विदेश मंत्री ने कहा कि यदि ईरान अपना परमाणु संवर्द्धन कार्यक्रम स्थगित कर दे तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसके साथ बातचीत कर सकता है.

उनका कहना था कि यह ईरान के हित में होगा और सुरक्षा परिषद की कार्रवाई को भी रोका जाएगा. उन्होंने ईरान को सकारात्मक रुख़ अपनाने का सुझाव दिया

मार्गरेट बैकेट ने कहा कि जब तक ईरान को प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं दे दी जाती तब तक मसौदे को जारी नहीं किया जाएगा.

छह देशों में अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी शामिल हैं.

ईरान-अमरीकी संबंध

दूसरी ओर अमरीका ने बुधवार को घोषणा की थी कि वह परमाणु मसले पर ईरान के साथ बातचीत में यूरोपीय देशों के साथ शामिल होने को तैयार है, बशर्ते ईरान अपने यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम पर रोक लगा दे.

अमरीकी प्रस्ताव का स्वागत करते हुए यूरोपीय देशों ने कहा था कि ईरान को इसका सकारात्मक जवाब देना चाहिए.

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने कहा था कि ईरान को अमरीकी नीति में परिवर्तन के महत्व को समझना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद से अमरीका और ईरान के बीच राजनयिक संबंध नहीं है.

तीन सप्ताह पहले ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेज़ाद ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को एक चिट्ठी लिखी थी जो कि दोनो देशों के नेताओं के बीच 25 साल बाद हुआ पहला संवाद था.

लेकिन अमरीकी प्रस्ताव के जवाब में ईरान ने कहा था कि वह अमरीका के साथ बातचीत के लिए तैयार है लेकिन वह यूरेनियम संवर्द्धन का काम नहीं रोकेगा.

ईरान के विदेश मंत्री मनुचेहर मोत्तकी ने कहा कि अमरीका यदि ईरान के साथ बेहतर रिश्ता चाहता है तो उसे अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा.

अमरीका का आरोप है कि ईरान गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम चला रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

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