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रोज़गार क़ानून वापस लेने की घोषणा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने घोषणा कि है कि वहाँ के विवादित युवा रोज़गार क़ानून को वापस लिया जाएगा. ज़्याक शिराक ने कहा है कि सीपीई यानि फ़र्स्ट एम्प्लॉएमेंट कॉंट्रेक्ट नाम के इस क़ानून की जगह दूसरे क़दम उठाए जाएँगे ताकि बेरोज़गारी से निपटा जा सके. इस क़ानून के विरोध में फ़्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. विवादों में घिरे युवा रोज़गार क़ानून में प्रावधान था कि 26 साल से कम उम्र वाले युवा जब नौकरी की शुरुआत करेंगे, तो दो साल के अभ्यासकाल के दौरान उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है. फ़्रांस के प्रधानमंत्री डोमिनक-ड-विलपां का कहना था कि ये क़ानून देश में बेरोज़गारी कम करने के लिए एक उठाया गया एक क़दम था. उन्होंने पिछले हफ़्ते पत्रकार वार्ता में कहा था कि इस मुद्दे पर जारी विवाद को ख़त्म करने का समय आ गया है. श्रम संगठनों ने रोज़गार क़ानून ख़त्म करने के लिए फ़्रांस सरकार को इस हफ़्ते के अंत तक का समय दिया था. संगठनों ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे हड़ताल करेंगे. रोज़गार क़ानून वापस लेने की घोषणा सोमवार को फ़्रांसीसी राष्ट्रपति, फ़्रांसीसी प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक के बाद हुई. माना जा रहा है कि बेरोज़गारी से निपटने के लिए उठाए जाने वाले नए क़दमों के बारे में डोमिनक-ड-विलपां बाद में और जानकारी देंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें फ़्रांस में हड़ताल का व्यापक असर04 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना फ्रांस का विवादास्पद रोज़गार क़ानून?04 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना संशोधनों का शिराक का प्रस्ताव बेअसर01 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना रोज़गार क़ानून पर शिराक का आश्वासन31 मार्च, 2006 | पहला पन्ना फ़्रांस में हड़ताल, प्रदर्शन28 मार्च, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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