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फ़्रांस में हड़ताल, प्रदर्शन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस में नए विवादास्पद श्रम क़ानून के विरोध में पूरे देश में चौथे दिन भी हड़ताल जारी है और लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. बैनर उठाए और सीटी बजाते हुए हज़ारों प्रदर्शनकारी राजधानी पेरिस के बीचोंबीच गुज़रे और रैली की. एक श्रम संगठन के अनुसार साढ़े सात लाख प्रदर्शनकारी जमा हुए. श्रम संगठनों का कहना है कि नए क़ानून का इस्तेमाल कर मालिक यूवाओं का शोषण करेंगे. नए क़ानून में प्रावधान है कि 26 साल से कम उम्र वाले युवा जब नौकरी की शुरुआत करते हैं तो दो साल के अभ्यासकाल के दौरान उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है. लेकिन सरकार का कहना है कि नए क़ानून से यूवाओं में बेरोज़गारी घटेगी और श्रम बाज़ार और लचीला हो सकेगा. फ़्रांस के गृह मंत्री निकोलस सार्कोज़ी ने पुलिस के कहा है कि वह युवा प्रदर्शनकारियों को नकाबपोश लोगों से बचाएँ क्योंकि वे प्रदर्शनकारियों और पुलिस पर वार कर रहे हैं. सार्वजनिक क्षेत्र में हड़ताल के कारण रेलगाड़ियों और बसों की आवाजाही, विमानों की उड़ानें और स्कूल का कामकाज प्रभावित हुआ है. उधर फ्रांस के प्रधानमंत्री डोमिनीक द विलेपाँ कह चुके हैं कि नए क़ानून को वापस नहीं लिया जाएगा लेकिन वे इसमें संशोधनों के बारे में विचार कर सकते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें दोषी पाए गए विदेशी निकाले जाएंगे09 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना दंगाइयों ने पुलिस पर गोलियाँ चलाईं07 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना क़ानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता: शिराक06 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना पेरिस के बाहरी इलाक़े में हिंसा जारी03 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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