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संशोधनों का शिराक का प्रस्ताव बेअसर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस में छात्रों और श्रमिक संगठनों ने विवादास्पद श्रम क़ानून को कुछ संशोधनों के साथ लागू करने के राष्ट्रपति ज्याक़ शिराक के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. शिराक ने शुक्रवार को कहा था कि उनका कुछ फ़ेरबदल के साथ नए क़ानून को लागू करने का इरादा है. श्रमिक संगठनों के नेताओं ने कहा है कि वे अगले सप्ताह आम हड़ताल बुलाने के कार्यक्रम पर अडिग हैं. श्रमिक संगठनों के एक प्रवक्ता ज्याँ लुई वाल्टर ने कहा कि राष्ट्रपति शिराक़ के भाषण से लगता है कि उन्हें इस विवाद की कोई समझ नहीं है. टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए शिराक ने कहा कि लोकतंत्र का सम्मान करते हुए वह नए क़ानून को लागू करने के लिए इस पर दस्तख़त करेंगे. हालाँकि शिराक ने साथ में यह भी कहा कि वह युवाओं की रोज़गार चिंताओं को भली-भाँति समझते हैं, और क़ानून को तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा. उन्होंने क़ानून के उन प्रावधानों में संशोधनों का भी आश्वासन दिया जिनके विरोध में देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं. पेरिस से बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार शिराक ने अपने भाषण में नए क़ानून पर विवाद से जुड़े हर पक्ष को ख़ुश करने की कोशिश की, लेकिन लगता है उनका प्रयास पूरी तरह नाकाम रहा है. नए श्रम क़ानून में कंपनियों के लिए 26 साल तक की उम्र के युवाओं को नौकरी पर रखना और नौकरी से निकालना, दोनों काम आसान हो जाएगा. एक सांवैधानिक समिति पहले ही क़ानून को हरी झंडी दिखा चुकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें रोज़गार क़ानून पर शिराक का आश्वासन31 मार्च, 2006 | पहला पन्ना फ़्रांस में चौथे दिन भी हड़ताल और प्रदर्शन28 मार्च, 2006 | पहला पन्ना फ़्रांस में हिंसक झड़पें, 160 गिरफ़्तार19 मार्च, 2006 | पहला पन्ना फ्रांस में श्रम क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन18 मार्च, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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