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फ़्रांस में हिंसक झड़पें, 160 गिरफ़्तार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस में नए विवादास्पद श्रम क़ानून के विरोध में लाखों लोगों के प्रदर्शनों के दौरान झड़पें हुई हैं और पुलिस ने कम से कम 160 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है और पुलिसकर्मियों समेत 24 लोग घायल हुए हैं. फ्रांस में कई जगह प्रदर्शन हुए और अधिकतर जगह ये शांतिपूर्ण रहे. लेकिन कुछ जगह जब हिंसक झड़पें हुईं तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस छोड़ी है और पानी बरसाया है. शनिवार शाम राजधानी पेरिस के दो इलाक़ों में हिंसक झड़पें होने लगीं. झड़पों की ख़बरें देश में कुछ अन्य जगहों - दक्षिण में मरसेई और उत्तर में लिल्ली से भी मिली हैं. घायलों में सात पुलिसकर्मी भी थे. श्रम संगठनों का कहना है कि नए क़ानून का इस्तेमाल कर मालिक यूवाओं का शोषण करेंगे. नए क़ानून में प्रावधान है कि 26 साल से कम उम्र वाले युवा जब नौकरी की शुरुआत करते हैं तो दो साल के अभ्यासकाल के दौरान उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है. लेकिन सरकार का कहना है कि नए क़ानून से यूवाओं में बेरोज़गारी घटेगी और श्रम बाज़ार और लचीला हो सकेगा.
शुक्रवार को फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक़ ने कहा था कि समय आ गया है कि दोनो पक्षों के बीच जल्द ही बातचीत हो. प्रधानमंत्री पर दबाव प्रधानमंत्री डोमिनीक द विलेपाँ की सरकार पर दबाव पड़ रहा है वह 26 साल से कम उम्र के लोगों पर लागू होने वाले ये प्रावधान वापस लें. यूनियन नेताओं ने दावा किया है इन प्रदर्शनों में लगभग तीन लाख लोगों ने पेरिस में रैली में हिस्सा लिया और देश भर में लगभग दस लाख लोगों ने प्रदर्शन किया. राजधानी पेरिस में रैलियों में भाग लेने वालों में छात्र, मज़दूर और पेंशनभोगी शामिल थे. प्रदर्शनकारियों की माँग है कि प्रधानमंत्री विलेपाँ विवादास्पद श्रम प्रावधान को वापिस लें जबकि विलेपाँ का कहना है कि युवाओं में बेरोज़गारी को कम करने के लिए यह बहुत ज़रूरी है. मज़दूर यूनियनों का कहना है कि यह प्रावधान कड़े संघर्ष के बाद हासिल किए गए मज़दूर क़ानूनों का दमन है. शुक्रवार को हुए एक जनमत-सर्वेक्षण के नतीजों से सामने आया कि लगभग 80 प्रतिशत लोग इस रोज़गार प्रावधान को वापिस लेने के हक में हैं लेकिन प्रधानमंत्री विलेपाँ ने फ़िलहाल तो ऐसा करने से इनकार कर दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें दोषी पाए गए विदेशी निकाले जाएंगे09 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना दंगाइयों ने पुलिस पर गोलियाँ चलाईं07 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना क़ानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता: शिराक06 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना पेरिस के बाहरी इलाक़े में हिंसा जारी03 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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