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फ़्रांस में हड़ताल का व्यापक असर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस में नए विवादास्पद श्रम क़ानून के विरोध में बुलाई गई आम हड़ताल के दौरान सार्वजनिक परिवहन और हवाई सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है और स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं. श्रम और छात्र संगठनों ने पाँचवी बार पूरे देश में हड़ताल का आहवान किया है. एक हफ़्ता पहले चौथी बार ऐसी ही हड़ताल का आहवान किया गया था जब लाखों प्रदर्शनकारी फ़्रांस की सड़कों पर उतरे थे. हड़ताल बुलाने वाले नेताओं ने अपने समर्थकों से वैसा ही शक्तिप्रदर्शन करने का अनुरोध किया है. श्रम संगठनों की चिंता है कि नए क़ानून का इस्तेमाल कर मालिक युवाओं का शोषण करेंगे. नए क़ानून में प्रावधान है कि 26 साल से कम उम्र वाले युवा जब नौकरी की शुरुआत करते हैं तो दो साल के अभ्यासकाल के दौरान उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है. लेकिन सरकार का कहना है कि नए क़ानून से यूवाओं में बेरोज़गारी घटेगी और श्रम बाज़ार और लचीला होगा. उधर राष्ट्रपति ज़्याक शिराक़ ने वादा किया है वे नए क़ानून को कुछ 'नरम' बनाने की कोशिश करेंगे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि श्रम संगठन को ऐसा आभास हो रहा है कि उनकी जीत संभव है और उनका मानना है कि यदि पहले जैसे एक और शक्ति प्रदर्शन होता है तो सरकार हार मान सकती है. राजधानी पेरिस में चार हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि पिछली बार की तरह हिंसक घटनाओं को रोका जा सके. | इससे जुड़ी ख़बरें फ्रांस का विवादास्पद रोज़गार क़ानून?04 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना संशोधनों का शिराक का प्रस्ताव बेअसर01 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना रोज़गार क़ानून पर शिराक का आश्वासन31 मार्च, 2006 | पहला पन्ना दोषी पाए गए विदेशी निकाले जाएंगे09 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना दंगाइयों ने पुलिस पर गोलियाँ चलाईं07 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना क़ानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता: शिराक06 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना पेरिस के बाहरी इलाक़े में हिंसा जारी03 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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