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शुक्रवार, 07 अप्रैल, 2006 को 14:41 GMT तक के समाचार
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इराक़ी पुलिस: क्या हैं चुनौतियाँ

इराक़ी पुलिस
पुलिस के सामने बहुत सी चुनौतियाँ हैं
इराक़ में अमरीकी सेना हज़ारों इराक़ियों को प्रशिक्षण दे रही है ताकि वे मज़बूत पुलिस बल का रूप ले सकें लेकिन विद्रोहियों के हमले और शिया-सुन्नी हिंसा जैसी अनेक चुनौतियाँ उनके सामने हैं.

एक नक़ली पिस्तौल हाथ में लिए हुए इंस्ट्रक्टर चिल्लाता है, "ज़ोर से चिल्लाओ, तुम्हें हमेशा ज़ोर से चिल्लाने की आदत होनी चाहिए."

बग़दाद की पुलिस अकादमी में सुबह के सत्र में यह हुनर सिखाया जाता है कि ख़तरे का आभास देने वाले किसी वाहन को कैसे रोका जाए और सुरक्षित रहते हुए किस तरह उसकी तलाशी ली जाए.

प्रशिक्षण के ही एक हिस्से के रूप में एक वाहन आता है जो वास्तविक स्थिति में कोई संदिग्ध वाहन हो सकता है. उसमें दो प्रशिक्षु बैठे होते हैं. इंस्ट्रक्टर चिल्लाता है, "कार रोको. हिलना मत. जिस वाहन को भी रोको, समझो उसमें से हिंसा होने वाली है."

इस्ट्रक्टर सार्जेंट रफ़ीद रहीम कहते हैं, "बहुत सावधान रहते हुए वाहन से दूर ही रहो, जब तक कि स्थिति तुम्हारे नियंत्रण में ना आ जाए."

फिर वह वाहन में बैठे प्रशिक्षुओं को आदेश देते हैं, "गाड़ी की चाबियाँ खिड़की से फेंको." चाबियाँ बाहर आ जाती हैं.

फिर इंस्ट्रक्टर दोनों प्रशिक्षुओं को वाहन से बाहर आने का आदेश देता है और उन्हें हाथ सिर पर रखते हुए घुटने ज़मीन पर टेकने को मजबूर करता है.

ये है इराक़ी प्रशिक्षुओं की पुलिस ट्रेनिंग का एक नमूना और उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे ख़तरनाक परिस्थितियों का मुक़ाबला करने के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित और मज़बूत साबित होंगे.

लेकिन चुनौती ये भी है कि इराक़ की नई प्रशिक्षित पुलिस अब इराक़ी विद्रोहियों का मुख्य निशाना है.

औसतन हर महीने 120 पुलिसकर्मी बम विस्फोट और गोलीबारी की घटनाओं में मारे जा रहे हैं और यह संख्या इराक़ में अमरीकी हताहतों से तीन या चार गुना ज़्यादा है.

चुनौतियाँ

बग़दाद पुलिस अकादमी से देश में आठ अकादमियों में सबसे बड़ी है जहाँ से हर महीने 3000 नए पुलिस जवान प्रशिक्षित होकर निकलते हैं.

इराक़
इराक़ में अक्सर हिंसा होती रहती है

अमरीकी सेना के मेजर जनरल जोसेफ़ पीटर्सन यह वर्ष पुलिस तैयार करने के नाम है, "हमारे पास अब एक लाख तीस हज़ार प्रशिक्षित पुलिसकर्मी हैं जो हथियारों से भी लैस हैं और हमारा लक्ष्य दो लाख तीस हज़ार जवान तैयार करना है."

लेकिन प्रशिक्षण के बाद निकले पुलिस जवानों के पास हथियारों की गुणवत्ता को लेकर चिंताएँ और शिकायतें भी हैं. कुछ की शिकायत है कि उनके पास बुलेट प्रूफ़ जैकेटों की कमी है.

शिया और सुन्नियों के बीच हिंसा के माहौल में भी उनके सामने नए प्रकार की चुनौतियाँ हैं.

जनरल पीटर्सन कहते हैं, जब हम इस तरह का पुलिस बल तैयार करते हैं तो हम किसी से यह नहीं पूछते हैं कि वे शिया हैं या सुन्नी लेकिन पिछले साल इस वास्तविकता का पता चला कि पुलिस बल शिया बहुल है."

पीटर्सन का कहना था कि वह इराक़ आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के पास गए और कहा, "आपकी क़ानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी वाली पुलिस यूनिट देश को प्रतिबिंबित नहीं करती है.

"मैं आपसे कहता हूँ कि आप पुलिस बल में और शिया भर्ती नहीं करें और अन्य समुदायों के लोगों को इसमें आने दें ताकि पुलिस बल में सामुदायिक संतुलन क़ायम रह सके."

पीटर्सन ने बताया कि इस सुझाव से मंत्री सहमत हो गए लेकिन इसमें अब भी संदेह है कि क्या चीज़ें वाक़ई बदल रही हैं.

पुलिस प्रशिक्षण में लगे एक इराक़ी अधिकारी ने पहचान छुपाने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय अन्य समुदायों को अब भी पुलिस बल में आने से रोकने की कोशिश में लगा है.

उस व्यक्ति ने कहा, "भर्ती करने वाले अधिकारियों के पास एक लिस्ट होती है जिसमें उन सभी के नाम होते हैं जो भर्ती के लिए आवेदन करते हैं और ये अधिकारी ही यह तय करते हैं कि पुलिस अकादमी कौन पहुँचेगा."

और इसकी पुष्टि इससे भी होती है जब पुलिस अकादमी में एक अधिकारी ने बताया कि वहाँ लगभग सभी प्रशिक्षु शिया थे.

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