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शुक्रवार, 07 अप्रैल, 2006 को 12:58 GMT तक के समाचार
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शिया-सुन्नी दंगों से फैली असुरक्षा

समारा में विस्फोट के बाद मज़ार परिसर
इस मज़ार परिसर में विस्फोट के बाद शिया-सुन्नी हिंसा भड़क उठी थी
इराक़ में इस साल फ़रवरी में जबसे समारा शहर में शिया मज़ार पर हमला हुआ, तबसे इराक़ में शिया-सुन्नी संघर्ष ने फिर से ज़ोर पकड़ लिया है.

इराक़ियों का कहना है कि हालत ऐसी है कि नमाज़ के लिए मस्जिद जाना तक मुश्किल हो गया है, ख़ासकर जुमे की नमाज़ के दौरान.

इसी सप्ताह बग़दाद में एक आत्मघाती हमलावर ने एक गाड़ी को एक मस्जिद के बाहर बने बैरिकेड से टकरा दिया.

निशाना शायद वे लोग थे जो शाम की नमाज़ के लिए आए थे. कम-से-कम 10 लोग मारे गए.

इराक़ियों का कहना है कि अब लोग मस्जिद कम ही जा रहे हैं, ख़ासकर ऐसी जगहों पर जहाँ ख़तरा हो सकता है.

और ये तब हो रहा है जबकि अधिकतर मस्जिदों के बाहर अब हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं.

लेकिन अभी भी बहुत से लोग हिम्मत जुटाकर शुक्रवार की नमाज़ में शामिल होते हैं.

सद्दाम हुसैन के शासनकाल में जुमे की नमाज़ के दौरान मौलवी केवल कुरान की चर्चा किया करते थे लेकिन अब इस दिन रोज़-ब-रोज़ के राजनीतिक घटनाक्रम की भी चर्चा होती है.

इराक़ी मस्जिद एक तरह से पैमाना हैं जिनसे इराक़ की पूरी स्थिति का हाल पता चल जाता है.

वहाँ जुमे की नमाज़ के दौरान जो कुछ कहा जाता है उससे पता चलता है कि इराक़ में पिछले तीन साल में मानसिकता किस तरह से बदलती रही है.

वैसे बग़दाद में केवल मस्जिदों के पास ही ख़तरा नहीं होता, वहाँ सड़कों के किनारे भी अक्सर बम रखे होते हैं या कई बार ऐसे ही चलते-चलते सड़क पर गाड़ियों से गोलीबारी शुरू हो जाती है.

हिंसा

इराक़ में हिंसा किस पैमाने पर हो रही है उसकी बानगी के लिए दो तरह के आँकड़ों पर ग़ौर करें.

समारा मज़ार परिसर के बाद लोगों में नाराज़गी
समारा मज़ार परिसर के बाद लोगों में नाराज़गी

पहला आँकड़ा -- हाल के हफ़्तों में हर दिन औसतन 75 इराक़ी नागरिक मारे गए हैं. ये संख्या वर्ष 2004 के आरंभ में मारे गए इराक़ियों की संख्या की तीन गुनी है.

अगला आँकड़ा -- वर्ष 2005 में 31,000 से अधिक चरमपंथी हमले हुए.

उसके एक साल पहले यानी वर्ष 2004 में हमलों की संख्या साढ़े 26 हज़ार थी.

वैसे एक बात देखने में आ रही है कि अब अमरीकी सैनिक उस संख्या में नहीं हताहत हो रहे और अब अमरीकी सैनिक बहुत बढ़-चढ़कर सामने नहीं आते.

अमरीकी अधिकारी कहते हैं कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि इराक़ की अपनी सेना की स्थिति बेहतर हुई है.

ऐसा हुआ बेशक है लेकिन कई सुन्नी गुट ये आरोप लगाते हैं कि इराक़ी पुलिस में शिया समर्थक हमलावरों को शामिल कर लिया गया है.

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