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संतान विहीन या संतान मुक्त! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यह ज़्यादा पुरानी बात नहीं है जब उन महिलाओं को संतान विहीन कहा जाता था जिनके बच्चे नहीं होते थे मगर अब इस सोच में बदलाव आने लगा है बच्चे पैदा नहीं करना किसी अभाव की स्थिति नहीं है. कुछ महिलाएँ इस माहौल से ख़ासी नाराज़ नज़र आईं जिसमें पारिवारिक जीवन पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है और ऐसी महिलाओं को बच्चे नहीं होने की स्थिति को 'संतान विहीन' कहने के बजाय 'संतान मुक्त' कहना ज़्यादा अच्छा लगने लगा है. ऐसी महिलाओं ने यह नया नारा निजी स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के लिए प्रयोग करना शुरू किया है यानी संतान नहीं है तो यह विहीनता नहीं बल्कि एक तरह की आज़ादी है. कुछ दिन पहले तक उन महिलाओं को संतान विहीन कहा जाता था जिनके बच्चे नहीं होते थे और इस अभिव्यक्ति में एक तरह का अभाव झलकता था लेकिन अब कुछ महिलाओं ने इसे अभाव नहीं मानकर आज़ादी का नाम दे दिया है. 30 वर्ष की उम्र के दौर वाली बहुत सी महिलाएँ संतान पैदा करने और उनकी परवरिश करने को इस रूप में देखने लगी हैं कि इससे उनकी आज़ादी छिनती है, करियर की संभावनाएँ कम होती हैं और वित्तीय ज़िम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं. लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पोलिटिकल साइंस में समाज विज्ञानी डॉक्टर कैथरीन हकीम ने इस बारे में एक दिलचस्प अध्ययन किया है. कैथरीन हकीम को इसमें ज़रा भी शक नहीं है कि ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो संतान नहीं चाहते. वह कहती हैं कि यूरोप के बहुत से देशों में लगभग दस प्रतिशत महिलाएँ ऐसी होती हैं जो 45 साल की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते बे-औलाद होती हैं. "इनमें वे महिलाएँ भी शामिल होती हैं जो अपनी मर्ज़ी से बे-औलाद रहना पसंद करती हैं और जो बच्चे पैदा करना टालती हैं और वे भी जो बच्चे पैदा करने में समस्याओं का सामना करती हैं, कुछ ऐसी भी हैं जो माँ नहीं बन सकतीं." बे-औलाद कैथरीन हकीम कहती हैं कि बहुत से देशों में ऐसे लोगों की संख्या बढ़कर 20 प्रतिशत हो जाएगी जो बे-औलाद रहना पसंद करते हैं. जर्मनी में ऐसे लोगों की संख्या पहले ही 30 प्रतिशत हो चुकी है क्योंकि इसे एक ऐसा देश माना जाता है जहाँ की ज़्यादातर नीतियाँ पारिवारिक जीवन के लिए सहयोगी नहीं हैं.
डॉक्टर कैथरीन हकीम कहती हैं कि लोगों ने अब यह सोचना शुरू कर दिया है कि अगर वह संतान विहीन हैं तो यह कोई अभाव नहीं है बल्कि परिवर्तित जीवन शैली का एक नमूना है. हालाँकि फ्रांस में अब भी विचार को गले उतारना मुश्किल नज़र आता है कि महिलाएँ अब यह विकल्प चुनने लगी हैं कि वे बच्चे पैदा नहीं करना चाहतीं. फ्रांस की एक 33 वर्षीय महिला अलेक्ज़ेंद्रा कहती हैं, "फ्रांस में बच्चों के बिना किसी महिला की मौजूदगी बहुत मुश्किल है." वह कहती हैं, "मैंने बच्चे नहीं पैदा करने का फ़ैसला करियर की वजह से नहीं किया बल्कि यह एक जीवन शैली का मुद्दा था, मैं अपना जीवन का आनंद अपनी तरह से उठाना चाहती हूँ." स्वीडन में रहने वाली मरिया कहती हैं कि उन्होंने 25 साल की उम्र में नसबंदी करा ली थी और बच्चे नहीं करने का फ़ैसला करके उन्हें कोई अफ़सोस नहीं है. यूरोप में भी अब अमरीका की तरह से ऐसे गुट बनने लगे हैं जो संतान विहीन होने के समर्थन में अपनी बात रखते हैं. बहुत से लोग काम के स्थानों में यह परंपरा बढ़ने पर भी नाराज़ हैं जिसमें माता-पिता को बच्चों की देखभाल के लिए अतिरिक्त सुविधाएँ दी जाती हैं जैसेकि छुट्टियाँ, काम के लचीले घंटे वग़ैरा. ब्रिटेन में संतान मुक्त संगटन - किडिंग एसाइड की नींव रखने वाले जोनाथन मैक्कालमंट कहते हैं कि वह यह देखकर तंग आ चुके हैं कि सरकार बच्चों की देखभाल के लिए छुट्टियाँ देती है और कर में भी छूट देती है. वह कहते हैं कि संतान विहीन और संतान वाले लोगों के बीच सरकारी सुविधाओं का बँटवारा सही नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें फ़्रांस में बच्चों के अवशेष मिले02 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'सशस्त्र संघर्ष में बच्चों का शोषण'27 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना 'संघर्ष में लड़कियों का शोषण'25 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना ग़रीबी और एड्स का चेहरा बनती महिलाएँ08 मार्च, 2005 | पहला पन्ना बचपन में माँ बनना ख़तरनाक है04 मई, 2004 | पहला पन्ना कम आय, कुपोषण, क़ाबलियत08 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना बच्चों के शोषण का व्यापार30 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना बाल श्रमिकों पर चिंता12 जून, 2003 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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