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शनिवार, 11 मार्च, 2006 को 17:42 GMT तक के समाचार
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मिलोसेविच और यूगोस्लाविया का गृहयुद्ध
स्लोबोदान मिलोसेविच
मिलोसेविच के ख़िलाफ़ पिछले साढ़े चार वर्षों से मुक़दमा चल रहा है
पिछले चार साल से ज़्यादा समय से अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध प्राधिकरण में मुकदमे का सामना कर रहे यूगोस्लाविया के पूर्व राष्ट्रपति स्लोबोदान मिलोसेविच की हिरासत में मृत्यु हो गई है.

मिलोसेविच 64 वर्ष के थे. एक नज़र डालते हैं महत्वपूर्ण माने जाने वाले स्लोबोदान मिलोसेविच के 13 साल के राजनीतिक कार्यकाल पर:

यूगोस्लाविया के नेता मार्शल टीटो के कार्यकाल के अंतिम दिनों में मिलोसेविच बैलग्रेड में एक 'आदर्श' कम्युनिस्ट कार्यकर्ता थे.

मार्शल टीटो की मृत्यु के बाद अप्रैल 1987 में जब वे सर्बिया की कम्युनिस्ट पार्टी में नबंर दो के नेता थे तो उन्हें कोसोवो भेजा गया.

वहाँ अल्पसंख्यक सर्बियाई जनता बहुसंख्यक अलबेनियाई लोगों के ख़िलाफ़ दमन का आरोप लगा रही थी.

वहाँ एक जनसभा को संबोधित करते हुए, कोसोवो में अल्पसंख्यक सर्बियाई जनता से मिलोसेविच ने कहा, "दोबारा कभी भी कोई आपकी पिटाई करने की हिम्मत नहीं करेगा."

इसके बाद उन्हें सर्बियाई जनता का भरपूर समर्थन मिलने लगा और वे एक कम्युनिस्ट नेता से सर्बियाई राष्ट्रवाद का नारा लगाने वाले नेता बन गए.

इसके बाद सर्बियाई राष्ट्रवाद उनकी राजनीति के केंद्र में रहा.

 दोबारा कभी भी कोई आपकी (सर्बियाई जनता की) पिटाई करने की हिम्मत नहीं करेगा
मिलोसेविच

उन्होंने 1987 में ही अपने दोस्त और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता आईवान स्टैंबोलिक से पार्टी का नेतृत्व हथिया लिया. कोसोवो और वोज्वोदिना प्रांतों की स्वात्तता ख़त्म कर दी गई.

वर्ष 1989 में सर्बिया के राष्ट्रपति बन गए. वर्ष 1990 में यूगोस्लाविया की कम्युनिस्ट पार्टी का पतन हो गया और वहाँ कांग्रेस ने बहुपार्टी व्यवस्था कायम कर दी.

लेकिन मिलोसेविच ने अन्य सुधार करने के सुझाव नहीं माने और क्रोएशिया के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस से वॉकआऊट किया.

जुलाई 1990 में सर्बियन कम्युनिस्ट पार्टी का नाम बदलकर सर्बियान सोश्लिस्ट पार्टी कर दिया गया लेकिन सत्ता, व्यवस्था और सरकारी मीडिया पर उसी का कब्ज़ा बना रहा.

जब क्रोएशिया ने चुनावों की घोषणा की तो मिलोसेविच ने चेतावनी दी कि यदि यूगोस्लाविया का पतन होता है तो सर्बिया की सीमाएँ इस तरह बनानी होंगी कि अन्य गणराज्यों में रहने वाले सर्बियाई लोग भी उसमें शामिल हो सकें.

कोसोवो में नौटो सैनिक
1987 में सर्बियाई अल्पसंख्यक समुदाय की हालत देखते हुए मिलोसेविच को कोसोवो भेजा गया

यूगोस्लाविया पर गृह युद्ध के बाद मंडराने लगे.

यूगोस्लाविया का गृहयुद्ध

क्रोएशिया में चुनावों की घोषणा के बाद मिलोसेविच वहाँ के अल्पसंख्यक सर्बियाई लोगों के बचाव में उतरे और दिसंबर 1991 में यूगोस्लाव पीपुल्सल आर्मी और सर्बियाई अलगाववादियों ने क्रोएशिया की एक-तिहाई भूमि पर कब्ज़ा कर लिया.

बीस हज़ार लोग मारे गए और चार लाख लोग बेघर हो गए. संयुक्त राष्ट्र ने यूगोस्लाविया पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए.

उधर बोस्निया ने अप्रैल 1992 में जनमत संग्रह के बाद स्वतंत्रता की घोषणा कर दी और पूरे प्रांत में हिंसा भड़क उठी.

मिलोसेविच ने घोषणा की कि वे 'क्रोएशियाई जनसंहार और इस्लामी कट्टरपंथ' के ख़िलाफ़ सर्बियाई जनता का बचाव करेंगे.

उधर यूगोस्लाविया अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग पड़ गया.

वर्ष 1995 की गर्मियों में क्रोएशिया की सेना ने सैनिक अभियान में अपनी वो सारी भूमि वापस ले ली जिस पर सर्बिया ने कब्ज़ा कर लिया था.

वहाँ से दो लाख सर्बियाई लोगों का पलायन हुआ.

बोस्निया
बोस्निया ने 1992 में जनमत संग्रह के बाद स्वतंत्रता की घोषणा की और हिंसा भड़क उठी

इसके बाद बोस्निया के सर्बियाई लोगों के ख़िलाफ़ सैनिक अभियान हुआ. तीन हफ़्ते तक नैटो की सेनाओं ने बमबारी की और मिलोसेविच को शांति वार्ता करने पर मजबूर होना पड़ा.

डेयटन समझौता

मिलोसेविच को डेयटन समझौते पर हस्ताक्षर करने पड़े और बोस्निया की लड़ाई ख़त्म हुई.

उन्होंने महासर्बिया बनाने के अपने दावे को छोड़ दिया जिससे कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध उठा लिए गए.

स्थानीय चुनावों के नतीजों में धाँधली के आरोपों के बाद वर्ष 1996-97 में मिलोसेविच की सरकार के ख़िलाफ़ भीषण प्रदर्शन होने लगे जिनमें हज़ारों लोगों ने भाग लिया.

मिलोसेविच को विवश होकर तीन महीने के बाद विपक्ष की बात माननी पड़ी.

जलाई 1997 में केंद्रीय संसद ने मिलोसेविच को यूगोस्लाविया का राष्ट्रपति चुना क्योंकि संसद में उनके समर्थकों को बहुमत हासिल थी.

कोसोवो के मुद्दे पर नैटो की बमबारी पर कई सर्बियाई चकित थे लेकिन काफ़ी जनसमर्थन मिलोसेविच के साथ ही था.

जनता का गुस्सा

जब मिलोसेविच ने सितंबर 2000 में चुनावों की घोषणा की तो देश पर प्रतिबंध लगे हुए थे और अनेक सर्बियाई लोग ग़रीबी का सामना कर रहे थे.

सर्बिया का साथ देने वाला एकमात्र गणराज्य मॉंटीनेग्रो भी अलग होने की धमकी दे रहा था.

जब चुनाव में मिलोसेविच ने विपक्ष के नेता वायस्लाव कुस्तुनिका की जात को मानने से इनकार कर दिया तो लाखों लोग सड़कों पर उतर आए.

बैलग्रेड में आम हड़ताल बुलाई गई और दस दिन के बाद प्रदर्शनकारियों ने संसद और सरकारी टीवी स्टेशन की इमारतों को आग लगा दी. कई पुलिसकर्मी भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने लगे.

संसद पर विपक्ष के कब्ज़े के बाद मिलोसेविच और उनकी पत्नी को शहर छोड़कर भागना पडा.

छह महीने बाद स्लोबोदान मिलोसेविच को ग़िरफ़्तार कर लिया गया.

इसके बाद उन्हें जनसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध के आरोपों में अंतरराष्ट्रीय युद्दापराध न्यायालय के कटघरे में खड़ा कर दिया गया.

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