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अमरीका ईरान पर दबाव के पक्ष में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए दबाव जारी रखना चाहिए. बोल्टन ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बात को नज़रअंदाज़ करने के ईरान के रुख़ को देखते हुए तुरंत क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है. बोल्टन का यह बयान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड के उस फ़ैसले के बाद आया है जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम विवाद को सुरक्षा परिषद को सौंपने का फ़ैसला किया गया है. ईरान ने कहा है कि शांतिपूर्ण समाधान के लिए उसने पूरी कोशिश कर ली है लेकिन अमरीका ने कूटनीतिक प्रक्रिया को अपने 'क़ब्ज़े' में ले लिया है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में ईरान के राजदूत अली असग़र सुल्तानिए ने कहा, "हम टकराव नहीं चाहते हैं लेकिन अगर यह अमरीकियों की नीति या इच्छा है तो ईरानी राष्ट्र अपने सम्मान और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा." रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवरौफ़ ने कहा कि ऊर्जा एजेंसी को इस मसले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कोशिशें जारी रखनी चाहिए. उन्होंने संदेह व्यक्ति किया कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने से कोई नतीजा निकलेगा, "मैं नहीं समझता कि हाल के इतिहास में ऐसा कोई मामला हुआ हो जिसमें किसी देश के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए गए हों और उससे संकट का हल निकला हो." अमरीका का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान विवाद अब सुरक्षा परिषद में 08 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर बैठक बिना नतीजे के ख़त्म03 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने कहा, दबाव में नहीं आएंगे05 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर आईएईए की महत्वपूर्ण बैठक06 मार्च, 2006 | पहला पन्ना 'आईएईए ईरान को मुआवज़ा दे'07 मार्च, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर बारादेई की रिपोर्ट आज08 मार्च, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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