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क्लेमांसु को फ्रांस ने वापस बुलाया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ज्याक शिराक ने नौसैनिक पोत क्लेमांसु को स्वदेश लौटने का आदेश दिया है. भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि क्लेमांसु एक विशेषज्ञ दल की रिपोर्ट आने तक भारतीय जल सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता. अब फ्रांस की शीर्ष अदालत ने फ़ैसला सुनाया है कि क्लेमांसु मामले की पेरिस की अदालत में सुनवाई पूरी होने तक उसे स्वदेश बुला लिया जाए. पर्यावरणवादियों ने क्लेमांसु को भारत में तोड़ने के फ़ैसले का ज़ोरदार विरोध किया था क्योंकि उनका कहना था कि इस पर सैकड़ों टन एस्बेस्टस लदा है जो कामगारों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. दुनिया के ज़्यादातर देशों में एस्बेस्टस पर प्रतिबंध है और इससे कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ हो सकती हैं. ग्रीनपीस और अन्य एस्बेस्टस विरोधी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया था. अब तक यह युद्धपोत अरब सागर में खड़ा था क्योंकि भारत ने उसे अपनी जलसीमा में आने की अनुमति नहीं दी थी. इस जहाज़ को अंलग स्थित यार्ड में तोड़ा जाना था लेकिन अब फ्रांसीसी सरकार इस पर लदे एस्बेस्टस को उतारने के लिए तैयार हो गई है. भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब विशेषज्ञों की समिति इस बात की पुष्टि कर देगी कि पोत पर हानिकारक सामग्री नहीं है तभी उसे भारतीय सीमा में आने दिया जाएगा. मंगलवार को फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने इस बात की जाँच कराने की घोषणा की है कि अब तक युद्धपोत से कितना एस्बेस्टस निकाला जा चुका है और अभी कितना एस्बेस्टस उस पर मौजूद है. | इससे जुड़ी ख़बरें फ्रांस एस्बेस्टस उतारने को तैयार08 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस जानलेवा हो सकता है एसबेस्टस18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारतीय जलसीमा से दूर रहेगा क्लेमांसु16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस फ़्रांसीसी जहाज़ भारत में ही तोड़ा जाएगा31 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना 'ज़हरीले जहाज़' पर ग्रीनपीस का अनुरोध25 अप्रैल, 2005 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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