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भारतीय जलसीमा से दूर रहेगा क्लेमांसु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांसीसी नौसेना से हटाए गए युद्धपोत क्लेमांसु को 13 फ़रवरी तक भारतीय जलसीमा से दूर रखा जाएगा. क्लेमांसु को तोड़ने के लिए अधिकृत कंपनी ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट में यह आश्वासन दिया है. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट 13 फ़रवरी को क्लेमांसु से जुड़े विवाद पर फ़ैसला सुनाने वाला है. तब तक क्लेमांसु को भारतीय तट से 200 नॉटिकल मील दूर रखा जाएगा जो कि समुद्र में भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सीमा है. पर्यावणवादियों का आरोप है कि फ़्रांसीसी जहाज़ को तोड़ने से हज़ारों टन विषाक्त कबाड़ निकलेगा. जहाज़ को तोड़े जाने के लिए गुजरात के एक बंदरगाह पर ले जाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक कमेटी ने पिछले सप्ताह कहा था कि क्लेमांसु के बारे में पर्याप्त जानकारी मिलने तक उसे भारतीय जलसीमा से दूर रखा जाए. शुक्रवार को कमेटी की बैठक दोबारा होगी. स्वेज नहर पार करने की अनुमति इससे पहले मिस्र के अधिकारियों ने रविवार को क्लेमांसु को स्वेज नहर होकर गुजरने की अनुमति दे दी थी. ग्रीनपीस और अन्य पर्यावणवादी संगठनों का आरोप है कि फ़्रांसीसी पोत पर भारी मात्रा में एस्बेस्टस लदा हुआ है जो कि इसे तोड़ने वाले मज़दूरों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. पर्यावणवादियों का कहना है कि एसबेस्टस से फेफड़े का कैंसर हो सकता है. क्लेमांसु को गुजरात के अलंग यार्ड में तोड़ा जाना है जो कि जहाज़ों के कबाड़ की दृष्टि से दुनिया का सबसे बड़ा शिपयार्ड है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'ज़हरीले जहाज़' पर ग्रीनपीस का अनुरोध25 अप्रैल, 2005 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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