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मारे गए यात्रियों के संबंधियों में रोष | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लाल सागर में मिस्र के जहाज़ के डूबने से मारे गए लगभग 1000 यात्रियों के नाराज़ संबंधियों और सुरक्षाबलों के बीच सफ़ागा बंदरगाह पर झड़प हुई है. नाराज़ लोगों ने अपने संबंधियों के बारे में ठीक से सूचना नहीं मिलने पर नाराज़ होकर पुलिस पर पत्थर फेंके जिसके बाद पुलिस ने आँसू गैस का प्रयोग किया. इस बीच मिस्र के परिवहन मंत्री ने बीबीसी से बात करते हुए इस बात की पुष्टि की है कि जहाज़ के तट छोड़ने के थोड़ी देर बाद ही आग लग गई थी. मंत्री मोहम्मद मंसूर ने बताया कि इसके बाद भी चालकों को लगा कि वे स्थिति संभाल लेंगे और इस कारण वे जहाज़ को आगे बढ़ाते रहे. मंत्री ने बताया कि 380 से अधिक लोगों को अभी तक जीवित बचाया जा सका है. मिस्र के अधिकारियों ने कहा है कि हो सकता है कि जहाज़ में जीवनरक्षक नौकाएँ काफ़ी कम रही हों. जहाज़ पर लगभग 1400 लोग सवार थे जिनमें चालक दल के लगभग 100 लोग थे. समझा जा रहा है कि जहाज़ पर सवार लगभग 1000 यात्री डूब गए हैं. आग इससे पहले जहाज़ से बचकर लौटे यात्रियों ने बताया कि जहाज़ जब तट के निकट था तभी उसमें आग लग गई थी. लेकिन उन्होंने बताया कि आग के बावजूद चालक दल ने लगभग 1400 लोगों को लेकर जा रहे जहाज़ को नहीं रोका. बचे यात्रियों ने बताया कि फिर जहाज़ में विस्फोट हुआ जिसके थोड़ी देर बाद जहाज़ डूब गया. बचाव दल ने लगभग 350 यात्रियों को लाल सागर से बाहर निकाल लिया है. जहाज़ पर सवार अपने रिश्तेदारों की ख़बर लेने के लिए आतुर लोग सफ़ागा बंदरगाह पर जुटे और समय बीतने के साथ-साथ उनका धीरज टूटता गया. एक समय तो उन्होंने पुलिस पर पत्थर भी फेंकने शुरू कर दिए. मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अस्पताल जाकर बचे हुए यात्रियों से मुलाक़ात की. उन्होंने दुर्घटना की जाँच के आदेश दिए हैं. लौटकर आए यात्री बचकर लौटे यात्रियों ने कहा है कि अल सलाम बोक्कासियो '98 नामक जहाज़ गुरूवार रात को जैसे ही सऊदी अरब के दबा बंदरगाह से चला वैसे ही उसमें से लपटें निकलने लगीं. रिफ़त नाम के एक यात्री ने पत्रकारों को बताया,"गहरा धुआँ निकल रहा था. हमने पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है तो उन्होंने कहा कि वे इसे बुझा रहे हैं, लेकिन हालत बिगड़ती गई". उसने आगे बताया,"जहाज़ दो घंटे तक चलता रहा. फिर ये एक ओर झुका और पाँच मिनट के भीतर डूब गया".
रफ़त अल सय्यद नामक एक और यात्री ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि चालक दल के लोग आग बुझाने लगे और उन्होंने यात्रियों से कहा कि वे डेक पर जमा हों. एक और यात्री कामिल मोहम्मद अब्दुल अस्करी ने बताया,"आग लगी रही और चालक दल के लोग कहते रहे कि वे इसे बुझाने की कोशिश कर रहे हैं" अपने रिश्तेदार के बारे में जानने के लिए सफ़ागा आए अहमद अब्दुल हामिद ने एपी को बताया," क्या हो रहा है.. हमें ये बताने वाला कोई नहीं है". जाँच मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने जहाज़ दुर्घटना की जाँच के आदेश दिए हैं. राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा, "जिस गति से जहाज़ डूबा और ये बात की जहाज़ पर जीवन रक्षक रैफ़्ट नहीं थे,ये दर्शाता है कि सुरक्षा को लेकर कुछ समस्या थी." उन्होंने कहा कि जाँच के नतीजों के बारे में पहसे से कुछ नहीं कहा जा सकता. मिस्री अधिकारियों के अनुसार डूबे जहाज़ से कोई आपदा संदेश नहीं मिला था.
अल-सलाम बोकाचियो '98 नामक जहाज़ गुरूवार को सऊदी अरब के दबा नाम के बंदरगाह से दक्षिणी मिस्र के सफ़ागा बंदरगाह के सफ़र में था. दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि जब 35 साल पुराना जहाज़ डूबा तब बहुत तेज़ हवाएँ चल रही थीं. मिस्र का जहाज़ अल सलाम अंतिम बार डूबा के तट से 100 किलोमीटर की दूरी पर देखा गया था, जब उसका रडार संपर्क टूट गया. कंपनी के अनुसार जहाज़ पर सऊदी अरब और सूडान के भी 100 के क़रीब यात्री सवार थे. ब्रिटेन ने भी एक युद्धपोत राहत और बचाव कार्य में भाग लेने के लिए रवाना किया था लेकिन जब मिस्री अधिकारियों ने जब कहा कि इसकी कोई ज़रूरत नहीं है तो पोत को वापस बुला लिया गया. |
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