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'मिल गया डार्विन का जहाज़' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में वैज्ञानिकों ने उस जहाज़ का पता लगा लेने का दावा किया है जिस पर प्रसिद्ध जीव विज्ञानी चार्ल्स डार्विन ने अपने प्रयोगों के लिए दुनिया भर की यात्रा की थी. सेंट एंड्रयूज़ विश्वविद्यालय के एक दल ने इंग्लैंड में एसेक्स के एक दलदली इलाक़े से एक जहाज़ के अवशेष निकाले हैं जो डार्विन के प्रसिद्ध जहाज़ एचएमएस बीगल के अवशेष बताए जाते हैं. अब खोज दल की अगुआई कर रहे डॉ. रॉबर्ट प्रेस्कॉट ने इस स्थान की व्यापक खुदाई का प्रस्ताव किया है. इसके लिए उस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा जो ब्रिटेन के मंगल अभियान के लिए विकसित की गई थी. उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन के मंगल ग्रह अभियान को बीगल नाम ही दिया गया था, जो कि नाकाम रहा. बीगल मंगल अभियान के प्रमुख कॉलिन पिलिंजर के सहयोग से ही डॉ. प्रेस्कॉट ने 2000 में बीगल शिप रिसर्च ग्रुप की शुरुआत की थी. दुनिया भर की यात्रा
दो सौ साल पहले उत्पत्ति के सिद्धांत संबंधी अपने प्रयोग के लिए डार्विन ने 27 मीटर लंबे जहाज़ एचएमएस बीगल का उपयोग किया था. धरती का चक्कर लगाने के बाद में इस जहाज़ को साउथएंड तट पर तस्करों से निपटने के लिए तैनात किया गया था. अत्याधुनिक रडार तकनीक के सहारे पता लगाए गए अवशेष पोटन द्वीप के पास दलदल में पाँच मीटर नीचे पाए गए. खोज दल को एक लंगर भी मिला है जो संभवत: बीगल जहाज़ के तटरक्षक पोत में बदले जाने के बाद प्रयुक्त किया था. |
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