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फ़लस्तीनी चुनाव में भारी मतदान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान ख़त्म हो गया है. पश्चिमी तट और ग़ज़ा पट्टी में बड़ी संख्या में लोगों ने मतदान किया. इस चुनाव में भारी मतदान होने और सत्तारूढ़ फ़तह पार्टी को चरमपंथी संगठन हमास के बीच कड़े मुक़ाबले की संभावनाएँ व्यक्त की गई हैं. हमास पहली बार चुनाव लड़ रहा है और उसके उम्मीदवारों के अच्छे प्रदर्शन की संभावनाएँ व्यक्त की गई हैं. यह भी कहा जा रहा है कि ये चुनाव फ़लस्तीनियों के सत्ता ढाँचे को व्यापक रूप से बदलने की संभावना वाले हैं. हाल के महीनों में हमास के लिए समर्थन बढ़ा है और कुछ दिन पहले हुए स्थानीय निकायों के चुनाव में हमास के उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया था. अगर हमास इस चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसके उसके प्रतिनिधि कैबिनेट में भी जगह पा सकते हैं. इसराइल ने आगाह किया है कि अगर हमास कैबिनेट में शामिल होता है तो शांति प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है. फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने रामल्ला में अपना वोट डाला और चुनावों को एक फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की दिशा में एक क़दम बताया. चुनावी मुद्दे दस साल में पहली बार हुए इस चुनाव से पहले कई जगह हिंसा हुई लेकिन फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठनों ने कहा है कि वे सुनिश्चित करेंगे कि मतदान के दौरान शांति रहे.
हमास ने पहली बार अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं जिससे इसराइल, अमरीका और यूरोप में कुछ चिंता देखी गई है. वहाँ हमास पर एक आतंकवादी संगठन के रूप में प्रतिबंध लगा हुआ है. रामल्ला में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बहुत से फ़लस्तीनी लोगों का ख़याल है कि सत्तारूढ़ फ़तह पार्टी इसराइल के साथ शांति स्थापना करने में नाकाम रही है. ग़ौरतलब है कि फ़तह पार्टी की स्थापना पूर्व फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने किया थी. साथ ही यह भी विचार है कि फ़तह पार्टी को अर्थव्यवस्था की ख़राब हालत के लिए भी ज़िम्मेदार बताते हैं जिसमें अक्षमता और भ्रष्टाचार का हाथ रहा है. मतदान के दौरान शांति बनाए रखने के लिए हज़ारों फ़लस्तीनी पुलिस जवान तैनात किए गए हैं चरमपंथी संगठनों ने भी मतदान में बाधा नहीं पहुँचाने का आहवान किया है. मतदान केंद्रों के पास हथियार ले जाने का अधिकार सिर्फ़ वर्दी पहने हुए सुरक्षाबलों को ही दिया गया है. आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने वॉयस ऑफ़ पेलिस्टाइन रेडियो पर कहा कि करीब 13 हज़ार पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी मतदान केंद्रों पर तैनात किए गए हैं. मुख्य पार्टियाँ इस संसदीय चुनाव में 132 सीटों के लिए मतदान हुआ. मुख्य मुक़ाबला सत्ताधारी दल फ़तह और चरमपंथी संगठन हमास के बीच माना जा रहा है. फ़तह को हमास से कड़ी टक्कर मिलने की संभवाना जताई गई है. पिछली बार फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव 1996 में हुए थे जिसमें हमास ने हिस्सा नहीं लिया था.
इसराइल और अमरीका ने कहा है कि अगर नई सरकार में हमास के सदस्य शामिल होंगे तो वो उसे नहीं मानेगें. यरुशलम में रहने वाले 5.5 फ़ीसदी फ़लस्तीनियों को पोस्टल बैलट के ज़रिए पूर्वी यरुशलम में वोट डालने की अनुमति दी गई थी. यरुशलम में रहने वाले बाकी एक लाख फ़लस्तीनी नागरिकों को शहर की सीमा से बाहर जाकर वोट डालना पड़ा. यरुशलम पर इसराइल का कब्ज़ा है. | इससे जुड़ी ख़बरें फ़लस्तीनी संसदीय चुनावपहला पन्ना पहले मतदान की इजाज़त21 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना फ़तह और हमास के बीच सहमति18 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना इसराइल के चुनाव फ़ैसले की निंदा16 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना येरूशलम में सशर्त प्रचार की इजाज़त09 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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