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इसराइल के चुनाव फ़ैसले की निंदा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेताओं ने इसराइली मंत्रिमंडल के इस फ़ैसले की आलोचना की है कि फ़लस्तीनी संसदीय चुनावों में चरमपंथी संगठन हमास को पूर्वी यरुशलम में भाग लेने से रोकने की कोशिश की जाएगी. ग़ौरतलब है कि फ़लस्तीनी राष्ट्रीय एसेंबली के चुनाव 25 जनवरी को होने हैं. इसराइली मंत्रिमंडल ने रविवार को हुई बैठक में पूर्वी यरुशलम में रहने वाले फ़लस्तीनियों को फ़लस्तीनी संसदीय चुनावों में भाग लेने देने की अनुमति तो दी लेकिन कहा कि हमास के सदस्यों को वहाँ चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश की जाएगी. लेकिन फ़लस्तीनी राजनेताओं ने चरमपंथी संगठन हमास के चुनाव में भाग लेने पर रोक लगाए जाने के इसराइल के फ़ैसले की निंदा की है. हमास ने कहा है कि वह चुनाव प्रचार की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगा. इसराइली मंत्रिमंडल के फ़ैसले के तुरंत बाद ही पुलिस ने पूर्वी यरुशलम में हमास के अनेक समर्थकों को हिरासत में ले लिया. इसराइली मंत्रिमंडल ने पूर्वी यरूशलम में हमास के चुनाव अभियान चलाने और उसके उम्मीदवारों के नाम मतपत्र में शामिल किए जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. हमास ने इसराइल की शर्त की निंदा की है और कहा है कि वह अपना चुनाव अभियान जारी रखेगा. समझा जाता है कि चुनाव में हमास के उम्मीदवारों का प्रदर्शन काफ़ी अच्छा रह सकता है. फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख वार्ताकार साएब एरेकात ने कहा है कि इसराइल को ऐसी शर्तें लादने का कोई अधिकार नहीं है. अनुमति इससे पहले इसराइली मंत्रिमंडल ने पूर्वी यरूशलमें रहनेवाले फ़लस्तीनियों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति दे दी और वे डाकघरों में जाकर मतदान कर सकेंगे. फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने धमकी दी थी कि यदि इसराइल पूर्वी यरुशलम में रह रहे फ़लस्तीनियों को चुनाव में भाग नहीं लेने देता तो वे चुनाव नहीं करवाएँगे. बीबीसी संवाददाता के अनुसार सभी मंत्री इस प्रस्ताव पर सहमत थे और ये वैसी ही व्यवस्था है जैसी कि पिछले सालों में रही है. पूर्वी यरूशलम में लगभग दो लाख फ़लस्तीनी रहते हैं और उन्होंने 1996 में हुए चुनाव में हिस्सा लिया था लेकिन तब हमास चुनाव में शामिल नहीं था. पूर्वी यरुशलम का इलाक़ा उन क्षेत्रों में से एक है जिसपर इसराइलियों ने 1967 की जंग में कब्ज़ा किया था. पूर्वी यरुशलम पर इसराइली क़ब्ज़े को अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं है. यरूशलम के इस हिस्से को अक्सर अरबी पूर्वी यरूशलम कहा जाता है क्योंकि यहाँ फ़लस्तीनियों की संख्या अधिक है और फ़लस्तीनियों को उम्मीद है कि वे अलग राष्ट्र बनने की स्थिति में उसे ही अपनी राजधानी बनाएँगे. | इससे जुड़ी ख़बरें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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