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विवादित गैस पाइप लाइन पर काम शुरू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस और पश्चिमी यूरोप को बाल्टिक सागर से होकर जोड़ने वाली एक विवादित गैस पाइप लाइन पर शुक्रवार से काम शुरू हो गया है. 1200 किलोमीटर लंबी इस गैस पाइप लाइन के पूरा होने पर जर्मनी और अन्य पश्चिमी यूरोपीय देशों को रुस से गैस मिलेगी. संभावना है कि वर्ष 2010 तक ये परियोजना पूरी जाएगी. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि रूस को ऊर्जा के क्षेत्र में सुपर पॉवर बनाने के लिए यह राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की रणनीति का अहम हिस्सा है. लेकिन इस पाइपलाइन को लेकर विवाद भी है. पोलैंड और यूक्रेन को आशंका है कि इससे उनकी ऊर्जा ज़रूरतों पर विपरीत असर पड़ सकता है. विवाद दरअसल इस समय इन दोनों देशों को रूस की ओर से सस्ते दर पर गैस मिलता हैं क्योंकि पश्चिमी देशों को रूस से मिलने वाली गैस इन देशों से होकर ही मिलती है.
लेकिन इस परियोजना के पूरा होने पर ये दोनों देश इससे कट जाएँगे. पाँच अरब डॉलर की इस परियोजना पर इस साल सितंबर में जर्मन चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर के सत्ता गँवाने के ठीक पहले सहमति हुई थी. पश्चिमी यूरोप की गैस ज़रूरतों का एक चौथाई हिस्सा रूस आपूर्ति करता है. अपने सीमित संसाधनों के कारण इस मामले में जर्मनी की निर्भरता तो और भी ज़्यादा है. | इससे जुड़ी ख़बरें पाइप लाइन पर भारत-ईरान बैठक03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस गैस लाइन के अहम पहलुओं पर चर्चा13 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस गैस पाइपलाइन पर भारत-पाक वार्ता12 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस गैस पाइप लाइनों के लिए चर्चा को मंज़ूरी09 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस गैस पाइपलाइन के मुद्दे पर भी बात होगी19 नवंबर, 2004 | कारोबार ईरान की संयम बरतने की अपील 21 मई, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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