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बकवास हैं अलावी के आरोप: तालबानी
तालबानी
तालबानी का कहना है कि इस समय इराक़ियों के पास लोकतांत्रिक अधिकार हैं
इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालबानी ने मानवाधिकारों की स्थिति के बारे में इराक़ के पूर्व प्रधानमंत्री ईयाद अलावी के आरोपों को 'बकवास' कहा है.

ईयाद अलावी ने कहा था कि देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन की स्थिति उतनी ही ख़राब है जितनी सद्दाम हुसैन के शासनकाल में थी.

जलाल तालबानी ने बीबीसी को बताया कि इस समय के इराक़ और सद्दाम हुसैन के समय के इराक़ में बहुत फ़र्क़ है.

तालबानी ने कहा, "इराक़ में स्वतंत्र चुनाव हुए हैं और विचार व्यक्त करने की भी स्वतंत्रता है जबकि सद्दाम हुसैन के समय में प्रताड़ना शिविर होते थे."

जलाल तालबानी ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि डॉक्टर अलावी ने ऐसा कहा है.

इराक़ी राष्ट्रपति का कहना था, “ ईयाद अलावी के कार्यकाल के दौरान तीन लोगों की पिटाई के बाद कथित तौर पर मौत हो गई थी लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अलावी सद्दाम हुसैन से भी बदतर हैं.”

अलावी का आरोप

इराक़ के पूर्व प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने ब्रिटेन के एक अख़बार द ऑब्ज़र्वर को दिए इंटरव्यू में कहा था कि ख़ुफ़िया पुलिस बहुत से आम इराक़ियों को ख़ुफ़िया बंकरों में प्रताड़ित कर रही है और वे वहाँ मारे भी जा रहे हैं.

 इराक़ में स्वतंत्र चुनाव हुए हैं और विचार व्यक्त करने की भी स्वतंत्रता है जबकि सद्दाम हुसैन के समय में प्रताड़ना शिविर होते थे
जलाल तालबानी

अमरीकी सैनिकों ने नवंबर के शुरू में आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय की इमारत के ही भीतर एक गुप्त क़ैदख़ाने में 170 ऐसे लोगों को बचाया था जिन्हें संभवतः बलपूर्वक बंदी बनाया गया था और उनके साथ सख़्ती बरती गई थी.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ ईयाद अलावी के इस बयान से शिया और कुर्द समुदाय के लोगों में नाराज़गी है. सद्दाम हुसैन के शासनकाल में इन समुदायों को ही निशाना बनाया गया था.

ग़ौरतलब है कि इराक़ में दिसंबर 2005 में संसदीय चुनाव होने हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस मुद्दे से चुनावी माहौल में गरमी आ जाएगी.

ईयाद अलावी इराक़ के पहले अंतरिम प्रधानमंत्री थे और जनवरी में हुए चुनाव में हार गए थे.

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