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इराक़ी अधिकारियों से लौटने का आग्रह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के रक्षा मंत्रालय ने मेजर के ओहदे तक के उन अधिकारियों से फिर सेना में लौटने का आग्रह किया है जो सद्दाम हुसैन के शासनकाल में फ़ौज में थे. इराक़ी सरकार के प्रवक्ता लाइथ कुब्बा का कहना है कि यदि ये अफ़सर सेना में लौटते हैं तो सेना के मनोबल को गिरने से रोका जा सकता है. बीबीसी के रक्षा संवाददाता रॉब वाटसन का कहना है कि इनमें से ज़्यादातर अधिकारी सुन्नी समुदाय के हैं और अब उनकी माँग इसलिए है क्योंकि इराक़ में जहाँ-जहाँ असंतोष और संघर्ष सबसे ज़्यादा है वो सुन्नी बहुल इलाक़े हैं. रॉब वाटसन का कहना है कि इराक के रक्षा मंत्रालय का ये एक महत्वपूर्ण कदम है. ये इराक़ के सुन्नियों तक पहुँचने का एक ऐसा प्रयास है जिससे इराक़ की सेना सही मायने में एक राष्ट्रीय सेना बन सकती है. सद्दाम हुसैन के शासनकाल के दौरान इराक़ी सेना के कई अफ़सर सुन्नी समुदाय के थे. लेकिन बीबीसी संवाददाता का ये भी कहना है कि यदि इस योजना के तहत सेना में सुन्नियों की संख्या बढ़ती भी है तो निश्चित तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि इराक़ की नई सेना की सारी समस्याएँ हल हो जाएँगी. अनुमान यही है कि अब भी सेना में काम कर रहे 70 प्रतिशत सैनिक सद्दाम हुसैन की सेना में काम कर चुके हैं. इस योजना के बावजूद सेना के सामने घुसपैठियों, ख़राब हथियार और एक भयंकर विद्रोह के बीच नई सेना को खड़ा करने जैसी समस्याएँ मौजूद हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़ में शिया-सुन्नी संघर्ष, 19 की मौत27 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना अब तक 2000 अमरीकी सैनिक मृत25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना बुश ने इराक़ी जनता की पीठ थपथपाई25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना इराक़ बम धमाकों में नौ की मौत25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना बग़दाद में तीन धमाके, 20 मारे गए24 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना बचाव पक्ष को सुरक्षा देने की पेशकश21 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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