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'बुश-मनमोहन के बीच फ़ोन पर बात' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने बताया है कि अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने शुक्रवार को भारतीय प्रधानमंत्री से टेलीफ़ोन पर बात की है. संजय बारू ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मुख्यतः परमाणु क्षेत्र में हुए समझौते के क्रियान्वयन को लेकर बात हुई. साथ ही उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बात की. संजय बारू ने इसे सामान्य बातचीत बताया. हाल ही में अमरीका ने भारत के छह असैनिक परमाणु और अंतरिक्ष संस्थानों से निर्यात प्रतिबंध हटाए हैं. अब ये संस्थान अमरीका से बिना विशेष लाइसेंस के संवेदनशील तकनीक ख़रीद सकेंगे. भारत और अमरीका ने जुलाई में परमाणु सहयोग के एक समझौते पर दस्तख़त किए थे जिसके तहत कहा गया था भारत के परमाणु संयंत्रों को ईंधन मिलेगा. जुलाई में अमरीका और भारत के एक साझा बयान में अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि भारत अति आधुनिक परमाणु तकनीक वाला एक ज़िम्मेदार देश है और उसे वो हर सुविधा और फ़ायदा मिलना चाहिए जो ऐसे देशों के पास है. अमरीका के इस फ़ैसले को उसकी नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा गया है क्योंकि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण करने के बाद अमरीका ने भारत की निंदा की थी और उसे परमाणु तकनीक के क्षेत्र में सहयोग देने पर रोक लगा दी थी. हाल ही में भारत ने आईएईए की बोर्ड की बैठक में परमाणु गतिविधियों को लेकर ईरान के ख़िलाफ़ मतदान किया था. भारत के इस फ़ैसले को भारत और अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते से जोड़ कर देखा जा रहा है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि भारत ने ये फ़ैसला अमरीका के दबाव में लिया. इस फ़ैसले के चलते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को घरेलू स्तर पर भी वामदलों और अन्य विपक्षी दलों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. |
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