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अमरीका ने भारत से प्रतिबंध हटाए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने छह असैनिक भारतीय परमाणु और अंतरिक्ष संस्थानों से निर्यात प्रतिबंध हटा लिए हैं. ये संस्थान अमरीका से बिना विशेष लाइसेंस के संवेदनशील तकनीक ख़रीद सकेंगे. अमरीका ने मई,1998 में परमाणु विस्फोट करने के बाद भारत पर प्रतिबंध लगा दिए थे. लेकिन इस साल की शुरुआत में भारत और अमरीका के बीच असैनिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमति हुई थी. दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच उच्च तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है. भारत में अमरीकी राजदूत डेविड मुलफोर्ड का कहना है,'' यह राष्ट्रपति बुश के रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को मज़बूत करने के लिए किए वादे का नतीज़ा है.'' अमरीका ने उन सामानों पर भी निर्यात प्रतिबंध हटा लिया है जिनको लेकर उन्हें आशंका थी कि वे परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. उल्लेखनीय है कि भारत ने अभी तक परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. बढ़ता सहयोग ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमरीका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया था.
अमरीका के इस फ़ैसले को उसकी नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण करने के बाद अमरीका ने भारत की निंदा की थी और उसे परमाणु तकनीक के क्षेत्र में सहयोग देना बंद कर दिया था. राष्ट्रपति बुश ने मनमोहन सिंह के साथ मुलाक़ात के दौरान परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक के लिए भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की थी. अमरीका ने कहा था कि एक ज़िम्मेदार देश होने के नाते भारत को भी वही सुविधाएँ मिलनी चाहिए जो अन्य देशों को मिल रही हैं. |
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