|
चंपी, करी और किताब के लिए सम्मान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में पहली बार भारतीय रेस्तराँ खोलने वाले उद्यमी को सम्मानित किया गया है. पटना में 1759 में पैदा हुए शेख़ दीन मोहम्मद ने 1810 में हिंदुस्तानी कॉफ़ी हाउस नाम का रेस्तरां मध्य लंदन में खोला था. इसके अलावा शेख़ दीन मोहम्मद को ब्रिटेन को शैंपू शब्द से परिचित कराने का भी श्रेय दिया जाता है. इतना ही नहीं, वे इंग्लैंड में अँगरेज़ी में छपने वाले पहले भारतीय लेखक भी रहे हैं. गुरूवार को उनकी उपलब्धियों का बखान करने वाली हरे रंग की एक तख़्ती का अनावरण किया गया, 'ग्रीन प्लाक' कही जाने वाली यह तख़्ती सामाजिक जीवन में अहम योगदान के लिए दिया जाने वाला विशिष्ट सम्मान है. ग्यारह साल की उम्र में दीन मोहम्मद फौज में भर्ती हो गए और कैप्टन के पद तक जा पहुँचे. वे 1782 तक सेना में रहे और कई लड़ाइयों में हिस्सा लिया, सेना से इस्तीफ़ा देने के बाद वे ब्रिटेन में बस गए. आयरलैंड में रहते हुए उन्होंने एक किताब लिखी थी जो किसी भी भारतीय की अँगरेज़ी में प्रकाशित पहली कृति है-- द ट्रेवल्स ऑफ़ दीन मोहम्मद. वे कुछ समय इंग्लैंड के पर्यटन स्थल ब्राइटन में रहने के बाद लंदन आ गए जहाँ उन्होंने नौकरी की. कुछ समय तक भाप स्नान और मालिश के पार्लर में काम करने के बाद उन्होंने अपना रेस्तराँ खोला. शैम्पू भाप स्नान में नौकरी करने के दौरान ही दीन मोहम्मद ने भारतीय उपचार के रूप में चंपी की शुरूआत की, इस 'चंपी' का नाम इतना फैला कि दीन मोहम्मद की पहुँच राजदरबार तक हो गई. इसी 'चंपी' का अँगरेज़ी रूप बन गया शैम्पू, दीन मोहम्मद को 'रॉयल शैंपूइंग सर्जन' कहा जाने लगा. वे जिस मसाज पार्लर में काम करते थे उसकी तो लंदन में धूम मच गई. उन्होंने 1810 में हिंदुस्तानी कॉफ़ी हाउस की शुरूआत की जिसमें भारतीय खाने के अलावा, भारतीय हुक्का भी पेश किया जाता था. उनका रेस्तराँ कुछ समय चलने के बाद बंद हो गया लेकिन उसके बाद ब्रिटेन में भारतीय रेस्तराँओं की भरमार हो गई. जिस जगह उनका रेस्तराँ था वहाँ अब कार्लटन हाउस नाम की इमारत है. दीन मोहम्मद रेस्तराँ खोलने के दो साल के भीतर ही दीवालिया हो गए लेकिन कुछ वर्ष बाद ही उन्होंने दोबारा मसाज पार्लर का कारोबार ब्राइटन में शुरू कर दिया. उनकी मौत 1851 में हुई और वे ब्राइटन में ही दफ़न हैं, उनके परिवार के सदस्य ब्रिटेन में ही रहते हैं. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||