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उत्तर कोरिया ने सहायता ठुकराई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि उसे अब विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत और सहायता की ज़रूरत नहीं है, साथ ही उसने यह भी आरोप लगाया है कि अमरीका इस कार्यक्रम का एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. उत्तर कोरिया के विदेश उपमंत्री चोई सु हॉन ने शुक्रवार को कहा कि देश के पास अब अन्य स्रोतों से पर्याप्त खाद्य सामग्री है. इस कार्यक्रम के तहत उत्तर कोरिया को क़रीब एक दशक से खाद्य सहायता मिल रही है. चोई सु हॉन ने आरोप लगाया कि अमरीका इस खाद्य सहायता को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. उत्तर कोरिया को अब अतिरिक्त खाद्य सामग्री चीन और दक्षिण कोरिया से मिलती है जो कड़ी निगरानी पर ज़ोर नहीं देते हैं. अनुमान है कि 1990 के दौर में पड़े अकाल में क़रीब 20 लाख लोगों की जान चली गई थीं. संयुक्त राष्ट्र का खाद्य कार्यक्रम उत्तर कोरिया के क़रीब 60 लाख ऐसे लोगों को भोजन मुहैया करा रहा है जो काफ़ी ग़रीब हैं और अभाव में जीते हैं. साथ ही वह यह निगरानी भी करता है कि क्या वह भोजन सामग्री ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँच रही है या नहीं. 'बहुत दिनों तक नहीं' उत्तर कोरिया के विदेश उपमंत्री चोई सु हॉन ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान से न्यूयॉर्क में मुलाक़ात के बाद कहा, "हमने महासचिव से अनुरोध किया है कि वह मानवीय सहायता इस साल के आख़िर तक रोक दें." चोई सु हॉन ने कहा कि उत्तर कोरिया में फ़सल अच्छी रही है लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमरीका ने मानवीय सहायता को मानवाधिकारों से जोड़कर इस कार्यक्रम का राजनीतिकरण कर दिया है.
लेकिन अमरीकी सरकार ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है कि राहत कार्यों के साथ राजनीतिक का मिश्रण किया गया है. अमरीकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, "अमरीका के सभी फ़ैसले संबंधित देश की ज़रूरत पर आधारित होते हैं जिसमें ज़रूरतों को देखा जाता है और इसमें हमारी यह क्षमता भी जुड़ी हुई होती है कि हम यह सुनिश्चित कर सकें कि सहायता राशि उन लोगों तक पहुँच भी रही है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है." चोई सु हॉन ने कहा, "मानवीय सहायता बहुत लंबे समय तक नहीं चल सकती. इस साल फ़सल बहुत अच्छी रही है और हमारी सरकार सभी लोगों को भोजन मुहैया कराने के लिए तैयार है." उन्होंने कहा कि इसके बदले संयुक्त राष्ट्र को लंबी अवधि के विकास कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. बीबीसी संवाददाता चार्ल्स स्कैनलॉन का कहना है कि उत्तर कोरिया के अधिकारी खाद्य सामग्री के वितरण की निगरानी के प्रयासों के मामले में धैर्य खो चुके हैं. संवाददाता का कहना है कि पिछले क़रीब दस साल में सहायता एजेंसियों को उत्तर कोरिया में खाद्य सामग्री के वितरण की निगरानी के लिए काफ़ी जद्दोजहद करनी पड़ी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के हवाले से कहा है कि विश्व खाद्य कार्यक्रम के अधिकारियों ने उत्तर कोरिया में खाद्य सामग्री के वितरण की निगरानी के लिए क़रीब छह हज़ार दौरे किए. विश्व खाद्य कार्यक्रम ने उत्तर कोरिया में इस साल अब तक क़रीब पौने तीन लाख टन खाद्य सामग्री भेजी है और साल 2005 के आख़िर तक 33 हज़ार टन और खाद्य सामग्री भेजे जाने की योजना है. उत्तर कोरिया को विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ़ से दवाइयाँ भी मिलती हैं. |
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