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सोमवार, 19 सितंबर, 2005 को 16:15 GMT तक के समाचार
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कोफ़ी अन्नान की दुनिया
कोफ़ी अन्नान
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश चलाते हैं अन्नान की दुनिया
बीबीसी के ख़ास कार्यक्रम की शृंखला कौन चलाता है आपकी दुनिया के तहत दुनिया में सैद्धांतिक तौर पर सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माने जाने वाले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने बीबीसी संवाददाता लिस डुसेट से बात की.

प्रश्न- सैद्धांतिक तौर पर आप वैश्विक संस्था के प्रमुख हैं. क्या आपको लगता है कि आप यह दुनिया चलाते हैं?

अन्नान- संयुक्त राष्ट्र का अपना प्रभाव है जिसमें शक्ति या सत्ता मुख्य नहीं है. यह संगठन मानदंड तय करता है. दृष्टि देता है जैसा कि ग़रीबी या एड्स जैसी मुसीबतों से निपटने के लिए हमने किया.

हम लोगों की रक्षा करने के मामले में ज़िम्मेदारी तय करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन आज के दिन सत्ता के मायने बदल गए हैं और कई स्तर पर इसके अर्थ लगाए जा रहे हैं.

हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करते हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर सरकारों की ज़िम्मेदारी है. हालांकि अब सरकारें भी अकेले काम नही कर सकती.

 मेरी दुनिया कौन चलाता है. संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश. वो मेरे नेता हैं ... मेरा सबकुछ हैं.
कोफ़ी अन्नान

सरकारों को निजी सेक्टर के साथ मिलकर काम करना होगा, सामाजिक संगठनों और समुदायों के साथ बात करनी होगी.

यह अवधारणा विचित्र है. जो स्थानीय बात होती है वो अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है और जो कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होता है उसका प्रभाव दूर दराज़ के गांवो पर भी पड़ता है.

मेरा ये मानना है कि स्थानीय इलाक़ों से ही शक्ति बढ़ेगी और ऊपर तक आएगी. ऊपर से कुछ भी थोपना मुश्किल रहेगा.

प्रश्न- आपके पास साधन हैं संस्थान हैं- दुनिया में कई चीज़ें बदलने की ताक़त है. आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो क्या आप इससे विचलित होते हैं?

अन्नान- यह तो अपने सदस्यों से ही शुरु करना होगा. लेकिन फिर मुश्किलें होती हैं. मुझे उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक सरकार के रुप में न देखा जाए. क्योंकि फिर इससे आलोचनाएं बढ़ेंगी.

कोफ़ी अन्नान
कभी कभी खुद को असहाय भी महसूस करते हैं अन्नान

हम चार्टर में आदर्शों को बनाए रखने में मदद करते हैं. मसलन मानवाधिकार को लीजिए. हमने मानवाधिकार का वैश्विक घोषणापत्र तैयार किया तो सारे देश इससे मानदंडों का पता कर सकते हैं.

हमने सूडान में स्थिति पर नियंत्रण करने की कोशिश की. विकास के मुद्दों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. रवांडा में असफलता मिली लेकिन सफलताएं भी मिली हैं और मैं मानता हूं कि संयुक्त राष्ट्र से फर्क तो पड़ता है.

प्रश्न- आपकी दुनिया कौन चलाता है?

अन्नान- मेरी दुनिया कौन चलाता है. संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश. वो मेरे नेता हैं ... मेरा सबकुछ हैं.

हां लेकिन हम जनता से भी जुड़े हुए हैं. जब मैं महासचिव बना तो एक काम जो मैंने किया वो ये कि संयुक्त राष्ट्र को जनता के और अधिक नज़दीक लाने की कोशिश की.

हम सरकारों से बात करते हैं. सुरक्षा परिषद फैसले करती है और महासभा भी कई फैसले करती है लेकिन मैं लोगों की बातें सुनने की पूरी कोशिश करता हूं.

कई बार स्वयंसेवी संस्थाएं स्वतंत्र रुप से काम करना चाहती हैं. सहयोग नहीं करती. उनके साथ अलग अलग तरीकों से काम करना होता है.

मेरे ख्याल से एक नेता को दूसरे की बात मानने की कला भी आनी चाहिए.

प्रश्न- तो क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि कभी कभी दुनिया का सबसे ताकतवर व्यक्ति भी खुद को बिना किसी शक्ति के पाता है?

अन्नान- यह बिल्कुल सही है. मैं मानता हूं कि हमें शक्ति या सत्ता की सीमाएं समझनी होंगी.

हर आदमी को सत्ता और शक्ति के मायने समझने होंगे. सत्ता पाकर इसके मद में चूर हो जाना ग़लत होगा. दूसरों की मदद के बिना कुछ भी संभव नहीं होता.

आप जो कुछ भी हैं वो लोगों के कारण हैं. लोगों के विश्वास के कारण हैं. लोग अपना विश्वास आपसे हटा लें तो आपका सबकुछ लुट सकता है.

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