|
सेक्स प्रतिबंध समय से पहले हटा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ्रीकी देश स्वाज़ीलैंड में 19 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों पर लगाया गया यौन प्रतिबंध वहाँ के राजा ने समय से पहले ही हटा लिया है. राजा एम्स्वाटि ने 2001 में पाँच वर्ष का प्रतिबंध लगाया था और किशोरियों के लिए ज़रूरी था कि वे ऊन का बना गुलूबंद जैसा कपड़ा अपने गले में डालकर रखें जो उनके सेक्स से दूर रहने की निशानी माना जाता था. मंगलवार को ये गुलूबंद एक समारोह में जला दिए जाएँगे और उसके बाद इन किशोरियों को यौन संबंध बनाने की आज़ादी मिल जाएगी. स्वाज़ीलैंड के इस रंगीन तबीयत राजा का कहना था कि उन्होंने देश में एड्स को रोकने के लिए यह आदेश दिया था, स्वाज़ीलैंड में दुनिया भर में एड्स संक्रमण सबसे अधिक है, वहाँ की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत एचआईवी प्रभावित है. इस प्रतिबंध को ख़ुद राजा ने ही तोड़ दिया था जब उन्होंने एक किशोरी से शादी की, उन्होंने इसके जुर्माने के रूप में लोगों को एक गाय दी. उन्होंने प्रतिबंध लगाने के दो महीने के भीतर 17 वर्ष की एक लड़की से शादी की जिसका बहुत विरोध हुआ और स्वाज़ी महिलाओं ने उनके महल के बाहर प्रदर्शन किया. स्वाज़ीलैंड के स्वास्थ्य विभाग के आँकड़े दिखाते हैं कि एचआईवी प्रभावित लोगों में से तीस प्रतिशत संख्या 19 वर्ष से कम आयु वाले लोगों की है. प्रतिबंध लगाने का कारण तो बताया गया था लेकिन उसे समय हटाने का कोई कारण नहीं बताया गया है. स्वाज़ीलैंड से बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि यह प्रतिबंध युवाओं में काफ़ी अलोकप्रिय था और बहुत कम शहरी लड़कियाँ गुलूबंद पहनती थीं. नियम अगर कोई व्यक्ति किसी किशोरी से संबंध बनाने का प्रस्ताव रखता है तो लेकिन अपने गले से उतारकर ऊनी गुलूबंद उस व्यक्ति के घर के बाहर फेंक देगी और उस व्यक्ति को जुर्माने के तौर पर एक गाय देनी होगी. लोगों को इस बात पर भी आपत्ति थी कि राजा एम्स्वाटि की किशोरी बेटियों को ऐसा गुलूबंद पहने हुए क्यों नहीं देखा जाता. ग्रामीण इलाक़ों में गाँव के मुखियाओं ने यह नियम कड़ाई से लागू किया था और गुलूबंद न पहनने वाली लड़कियों को स्कूल में दाख़िला नहीं दिया जाता था. 1982 में अपने पिता की मौत के बाद राजा बनने वाले एम्स्वाटि की कुल 12 पत्नियाँ हैं और वे तेरहवीं शादी करने जा रहे हैं, उनके पिता राजा सोबुजा ने तो 70 शादियाँ की थीं. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||