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ब्रिटेन में विशेष अदालतों पर विचार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन सरकार आतंकवादी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष गोपनीय अदालतें बनाने पर विचार कर रही है. इन अदालतों में किसी संदिग्ध व्यक्ति पर मुक़दमा चलाए जाने से पहले उपलब्ध जानकारियों के आधार पर सुनवाई की जाएगी और न्यायाधीश ये तय करेंगे कि प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मुक़दमा चलाया जा सकता है कि नहीं. इंग्लैंड और वेल्स के न्यायालय के प्रमुख लॉर्ड चांसलर लॉर्ड फ़ाकनर के अनुसार ऐसी अदालतों में ऐसे सूचनाओं के बारे फ़ैसला लिया जाएगा जो अभी क़ानूनी रूप से गवाह के तौर पर नहीं गिने जाते. इन सूचनाओं में टेलीफ़ोन पर बातचीत की रिकॉर्डिंग या फ़ोन टैपिंग जैसी चीज़ें शामिल हैं जिनको कि अभी साक्ष्य नहीं माना जाता. विशेष अदालत ये तय करेगी कि ऐसे साक्ष्यों के आधार पर मुक़दमा आगे चल सकता है या नहीं और अदालत की हरी झंडी मिलने के बाद फिर किसी अन्य अदालत में मुक़दमा चलाया जाएगा. वैसे ब्रितानी गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार इस बात की संभावना अभी कम है कि इन विशेष अदालतों पर नए आतंकवादी क़ानूनों के तहत चर्चा हो सकेगी. आतंकवाद विरोधी क़ानून ब्रिटेन में आतंकवाद विरोधी नए क़ानूनों पर संसद के शरतकालीन सत्र में चर्चा की जानी है. लॉर्ड फ़ाकनर ने साथ ही स्पष्ट करते हुए कहा,"ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मुक़दमा गुप्त रूप से चलेगा या उसमें जूरी के सदस्य नहीं होंगे". इस बीच ब्रिटेन में आतंकवाद निरोधी क़ानूनों में संदिग्ध व्यक्ति की हिरासत अवधि बढ़ाए जाने को लेकर भी बहस चल रही है. ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने पिछले सप्ताह ही कहा था कि सरकार ये देख रही है कि ऐसे मामलों में संदिग्ध व्यक्ति को कैसे दो सप्ताह से अधिक तक हिरासत में रखने का प्रावधान किया जाए. ब्रितानी पुलिस आतंकवादी मामलों को जटिल बताकर संदिग्ध व्यक्तियों को तीन महीने से अधिक समय तक जेल में रखना चाहती है. |
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