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मौलवी शेख़ बकरी ने ब्रिटेन छोड़ा
शेख़ बकरी
शेख़ बकरी उन मौलवियों में शामिल थे जिन्होंने सात जुलाई के हमलावरों की प्रशंसा की
ब्रिटेन के एटॉर्नी जनरल ने जिन तीन मौलवियों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला चलाए जाने के संकेत दिए थे उनमें से एक देश छोड़कर लेबनान चले गए हैं.

ब्रिटेन के कट्टरपंथी इस्लामी गुट अल मुहाजिरून के नेता शेख़ उमर बकरी के एक निकट सहयोगी अंजुम चौधरी ने बीबीसी को बताया कि वे शनिवार को ही लेबनान के लिए रवाना हो गए.

ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा था कि शेख़ बकरी के संगठन पर नए आतंकवाद विरोधी क़ानून के तहत प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

सात जुलाई को लंदन में बम धमाकों के बाद शेख़ बकरी, अबू इज़ादीन और अबू उज़ैर नाम के तीन मौलवियों ने हमलावरों की प्रशंसा की थी.

जाँच और दबाव के बीच सीरियाई मूल के मौलवी शेख़ बकरी ने पिछले वर्ष घोषणा की थी कि वे अपने संगठन को बंद कर रहे हैं लेकिन दरअसल उनके संगठन के सदस्य दो कट्टरपंथी गुटों में बँट गए और उनकी गतिविधियाँ जारी रहीं.

अंजुम चौधरी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि शेख़ बकरी को लग रहा था कि ब्रिटेन मुसलमानों के लिए सुरक्षित देश नहीं है और "ब्रिटेन ने इस्लाम के ख़िलाफ़ जंग शुरू कर दिया है."

चौधरी ने बताया कि शेख़ बकरी ने लेबनानी पासपोर्ट पर यात्रा की जो उन्होंने लंदन में लेबनान के दूतावास से हाल ही में हासिल की थी.

'हिजरत'

चौधरी ने कहा, "वे इस देश से हिजरत कर गए क्योंकि उन्हें लगा कि यहाँ उनके लिए अपने धर्म का पालन करना संभव नहीं रह गया था. उनका मानना है कि इस देश ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी है."

इस्लाम की परंपरा में हिजरत का अर्थ होता है ऐसी जगह चले जाना जहाँ अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता हो. चौधरी का कहना है कि वे किसी जाँच या कार्रवाई के डर से नहीं बल्कि अपने धर्म का पालन करने के लिए ब्रिटेन से चले गए हैं.

शेख़ के निकट सहयोगी चौधरी का कहना है कि वे आख़िरकार कहां रहेंगे यह अभी तय नहीं है लेकिन वे अपने देश सीरिया नहीं जा रहे हैं.

बताया जाता है कि शेख़ ने अपने समर्थकों से कहा है कि वे उनसे इंटरनेट के ज़रिए संपर्क बनाए रखेंगे.

चौधरी ने बताया कि शेख़ बकरी अपनी ज़ायदाद ब्रिटेन में ही छोड़ गए हैं और उनका परिवार भी ब्रिटेन में ही है, लेकिन इतना तय है कि वे ब्रिटेन नहीं लौटेंगे क्योंकि उनके पास ब्रितानी नागरिकता नहीं है.

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