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अमरीका ने सूडान में शांति दूत भेजे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सूडान में दो शांति दूतों को भेजा है ताकि उप राष्ट्रपति जॉन गरंग की मौत के बाद अधर में पड़ गई शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सके. अफ़्रीकी मामलों के सहायक विदेश मंत्री कोनी न्यूमैन और सूडान में अमरीका के विशेष दूत रोजर विन्टर सूडानी अधिकारियों से बातचीत करने के लिए रवाना हो गए हैं. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने सूडान के लोगों से शांति की अपील की है और कहा है कि वे शांति समझौते को लागू करने के लिए काम करें. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉम केसे ने बताया, "अमरीका के दोनों दूत दक्षिणी सूडान और ख़ारतूम की यात्रा करेंगे और विभिन्न गुटों से बात करेंगे ताकि शांति समझौता जारी रहे." उन्होंने बताया कि सूडान के दारफ़ुर इलाक़े के बारे में भी बातचीत की जाएगी. सोमवार को उप राष्ट्रपति और पूर्व विद्रोही नेता जॉन गरंग की मौत की घोषणा हुई. दरअसल शनिवार को ही गरांग का हेलिकॉप्टर यूगांडा से आते समय लापता हो गया था. हिंसा सोमवार को इसकी सरकारी तौर पर पुष्टि कर दी गई कि हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और इस हादसे में गरंग की भी मौत हो गई.
इस ख़बर के फैलते ही राजधानी ख़ारतून में हिंसा भड़क उठी और दंगों में कम से कम 20 लोग मारे गए. अभी ख़ारतूम में कर्फ़्यू लगा है और सैनिक शहर में गश्त लगा रहे हैं. तीन सप्ताह पहले ही शांति समझौते के तहत गरंग को उप राष्ट्रपति बनाया गया था. जनवरी में ही उन्होंने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बाद 21 साल से चल रहा गृह युद्ध समाप्त हो गया था. लेकिन गरंग की मौत के बाद भड़की हिंसा से शांति प्रक्रिया पर फिर सवाल उठने लगे हैं. गरंग के पूर्व विद्रोही गुट सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट ने संगठन के उप नेता साल्वा कीर को अगले उप राष्ट्रपति के रूप में नामांकित किया है. अमरीका के राष्ट्रपति बुश और संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान के साथ-साथ साल्वा कीर ने भी सूडानी जनता से संयम की अपील की है. |
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