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फ़्रांस ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस ने परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा पर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. फ़्रांस के प्रधानमंत्री डोमिनिक द विलपां ने कहा है कि अगर ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू किया तो यह मामला सुरक्षा परिषद में भेजा जाएगा. फ़्रांस के विदेश मंत्री फिलीप डूस्ट ब्लेज़ी ने कहा है कि ईरान ने अगर यह क़दम उठाया तो बड़ा अंतरराष्ट्रीय संकट पैदा हो जाएगा. दूसरी ओर ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इसफ़हान परमाणु केंद्र में काम शुरू करने की घोषणा वापस नहीं ली जाएगी. अभी तक फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी इस मामले पर अमरीका का समर्थन नहीं करते थे कि ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र में ले जाया जाए. इन देशों को यही उम्मीद थी कि ईरान मसले का हल बातचीत से ही निकल जाएगा. पिछले साल ईरान और तीन यूरोपीय देशों के बीच समझौता हो गया था. समझौते के मुताबिक़ ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने को राज़ी हो गया था. सहमति अब कम से कम फ़्रांस और अमरीका इस बात पर सहमत नज़र आ रहे हैं कि ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में ले जाया जाए. सोमवार को व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैकक्लीलैन ने कहा था कि अगर ईरान समझौते से हटता है तो अमरीका इस मामले को सुरक्षा परिषद में ले जाएगा. दूसरी ओर ईरान में सुरक्षा मामलों से जुड़ी सर्वोच्च परिषद के प्रवक्ता अली आग़ा मोहम्मदी ने कहा कि इसफ़हान परमाणु केंद्र पर कामकाज शुरू करने के फ़ैसले को वापस नहीं लिया जाएगा. बीबीसी के तेहरान स्थित संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन का कहना है कि अगर ईरान ने दोबारा परमाणु कार्यक्रम शुरू किया तो इससे दो सालों से चल रही बातचीत की प्रक्रिया ख़त्म हो जाएगी. ईरान के परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू करने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड की आपात बैठक बुलाई जा सकती है. लेकिन इसकी भी तैयारी चल रही है कि मामला सुरक्षा परिषद में ले जाया जाए. अमरीका और फ़्रांस के बयान से भी ऐसा लगता है. ईरान का कहना है कि वह इस बात से चिंतित नहीं है कि मामला सुरक्षा परिषद में ले जाया जाएगा. |
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