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शाह फ़हद को दफ़नाया गया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब के दिवंगत शाह शाह फ़हद को राजधानी रियाद में मंगलवार को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया. जनाज़े की नमाज़ के बाद शाह फ़हद के शव को क़ब्रिस्तान लाया गया जहाँ उन्हें दफ़ना दिया गया. इस मौक़े पर पूरे देश की मस्जिदों में विशेष नमाज़ अदा की गई. अंत्येष्टि में शाह फ़हद के उत्तराधिकारी शहज़ादा अब्दुल्ला समेत शाही परिवार के वरिष्ठ पुरुष सदस्यों ने हिस्सा लिया. शाह फ़हद को श्रद्धांजलि देने वालों में फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास, मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़, फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक और जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला शामिल थे. शाह फ़हद को अन्य आम लोगों और पूर्व शाहों की क़ब्रों के पास ही दफ़नाया गया. इस मौक़े पर प्रमुख मुफ़्ती ने कहा, "उनकी क़ब्र ऐसी ही होगी जैसी किसी भी आम मुसलमान की. उनमें और आम मुसलमानों में कोई फ़र्क़ नहीं है." सुरक्षा इंतज़ाम इस्लाम की वहाबी परंपरा के मुताबिक़ उनकी क़ब्र को अलग से चिह्नित नहीं किया गया है. शाह फ़हद की मौत के बावजूद सऊदी अरब का झंडा नहीं झुकाया गया क्योंकि वहाँ के हरे रंग के झंडे पर क़लमा लिखा हुआ है. अंत्येष्टि के बावजूद दुकानें, रेस्तराँ और सरकारी मंत्रालय खुले रहे. ओसामा बिन लादेन से जुड़े चरमपंथियों ने पिछले दो सालों में सऊदी अरब पर कई हमले किए हैं. इसे देखते हुए रियाद में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए. इमाम तुर्की बिन अब्दुल्ला नाम की जिस मस्जिद के पास उन्हें दफ़नाया गया वहाँ तक जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे. समर्थन शाह फ़हद पिछले दस साल से बीमार चल रहे थे. इस दौरान उन्होंने सारे अधिकार शहज़ादा अब्दुल्ला को दे दिए थे. सउदी अरब के प्रमुख मौलवी मुफ़्ती शेख़ अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्ला अल-शेख़ ने सभी लोगों को नए शाह और उनके भाई नए युवराज, सुलतान बिन अब्दुल अज़ीज़ का समर्थन करने के लिए कहा है. देश के नए शाह पहले ही ये कह चुके हैं कि सरकार का वर्तमान स्वरूप क़ायम रहेगा. जानकारों का कहना है कि शाह के रूप में अब्दुल्ला बिना किसी विवाद के कामकाज संभाल लेंगे. |
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