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सोमवार, 01 अगस्त, 2005 को 08:00 GMT तक के समाचार
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सऊदी अरब के शाह फ़हद का निधन
शाह फ़हद
शाह फ़हद क़रीब 10 साल से बीमार चल रहे थे
सऊदी अरब के शाह फ़हद की मौत हो गई है. सऊदी टीवी पर घोषणा की गई है कि शहज़ादा अब्दुल्ला को शाह फ़हद का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया है.

इस सिलसिले मे बुधवार को आधिकारिक समारोह आयोजित किया जाएगा.

शाह फ़हद क़रीब 10 साल से बीमार थे. 1995 में शाह फ़हद को दिल का दौरा पड़ा था और उसी समय से वे बीमार चल रहे थे.

उन्हें मंगलवार को सुपुर्दे ख़ाक किया जाएगा.

शाह की बीमारी के कारण कामकाज शहज़ादा अब्दुल्ला संभाल रहे थे.

सऊदी टीवी पर शाह फ़हद की मौत की जानकारी दी गई. टीवी पर एक बयान पढ़ा गया.

इस बयान में कहा गया, "बहुत दुख और शोक के साथ शाही अदालत शहज़ादा अब्दुल्ला बिन अब्देल अज़ीज़ और शाही परिवार के सभी सदस्यों के नाम पर ये शाह फ़हद बिन अब्देल अज़ीज़ की मौत की घोषणा करती है."

सऊदी टीवी पर नियमित कार्यक्रम रोक दिए हैं और क़ुरान की अयातें पढ़ी जा रही हैं. शाह फ़हद ने 1982 में सऊदी अरब का नेतृत्व संभाला था.

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने शाह अब्दुल्लाह से बात कर अपनी सांतवना व्यक्त की.

अमरीका की मौजूदगी

शाह फ़हद का जन्म 1922 में हुआ था. शाह फ़हद आधुनिक सऊदी अरब के संस्थापक इब्न सऊद के चौथे बेटे थे.

शाह फ़हद का शासनकाल सऊदी अरब में नाटकीय आधुनीकिकरण के साथ-साथ सऊदी स्थिरता को मिली चुनौती के कारण भी याद रखा जाएगा.

ईरान के साथ पैदा हुए तनाव के कारण 1987 में 400 से ज़्यादा ईरानी हाजी मारे गए थे. फिर सद्दाम हुसैन के शासनकाल में इराक़ ने कुवैत पर हमला किया और इससे इलाक़े की राजनीति पर गहरा असर पड़ा.

इलाक़े में लाखों की संख्या में अमरीकी सैनिक पहुँच गए और सऊदी अरब भी उनका एक अड्डा बना.

नाराज़गी

बीबीसी के मध्यपूर्व मामलों के संवाददाता रोजर हार्डी का कहना है कि इस्लाम की जन्मभूमि पर अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी के कारण सऊदी अरब के कट्टरपंथियों को नाराज़ हो गए.

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शहज़ादा अब्दुल्ला शाह फ़हद के सौतेले भाई हैं

1995 में शाह फ़हद को दिल का दौरा पड़ा. इसके बाद शाह फ़हद ने कामकाज अपने सौतेले भाई अब्दुल्ला को सौंप दिया.

उसी समय ओसामा बिन लादेन ने सऊदी अरब के शाही परिवार के ख़िलाफ़ बिगुल बजाया और सत्ता उखाड़ फेंकने की अपील की.

सऊदी अरब में अंदर ही अंदर एक इस्लामी आंदोलन की आधारशिला रखी जा रही थी. बढ़ते बेरोज़गार के कारण भी इस आंदोलन को बल मिला.

2003 में अल क़ायदा ने सऊदी अरब में भी बम धमाके और गोलीबारी की कार्रवाई शुरू की जिसके कारण 100 से ज़्यादा लोग मारे गए.

लेकिन 2005 के शुरू में वहाँ स्थानीय निकाय चुनाव हुए जिसे लोकतंत्र की दिशा में बड़ा क़दम माना गया.

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