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सूडान में गरांग गुट ने नया नेता चुना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूडान के उप राष्ट्रपति जॉन गरांग की मौत के बाद उनके गुट एसपीएलएम ने संगठन के उप नेता सालवा कीर को गरांग का उत्तराधिकारी नियुक्त किया है. वे राष्ट्रीय सरकार में नए उप राष्ट्रपति भी होंगे.सूडान की सरकार ने कहा है कि वो एसपीएलएम के निर्णय के मुताबिक़ चलेगी. उधर जॉन गरांग की मौत के बाद ख़ारतूम में भड़के दंगों को रोक़ने के लिए लगा कर्फ़्यू जारी है. ख़ारतूम में हुए इन दंगों में पुलिसकर्मियों समेत 12 लोगों की मौत हो गई है. जॉन गरांग की मौत की ख़बर फैलते ही लोग सड़कों पर उतर आए . जॉन गरांग की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी. विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. सूडान के राष्ट्रपति उमर अल बशीर ने ज़ॉन गरांग की मौत पर अफ़सोस जताया लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वे शांति प्रक्रिया जारी रखेंगे. तीन सप्ताह पहले ही जॉन गरांग को उप राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई थी. उस समय लाखों लोगों ने एक शांति समर्थक के रूप में उनका स्वागत किया था. दशकों तक चले गृह युद्ध के बाद हुए समझौते के तहत ही पूर्व विद्रोही नेता गरांग को उप राष्ट्रपति बनाया गया था. नेतृत्व उत्तर में सरकार के ख़िलाफ़ 21 साल तक चले ख़ूनी संघर्ष में गरांग ने ही इस गुट का नेतृत्व किया था. गरांग को रुख़ काफ़ी कठोर था और जो भी उनके रास्ते में आया वो या तो मारा गया या उसे क़ैद कर लिया गया. लेकिन उनकी ख़ासियत ये थी कि मतभेदों के बावजूद वे उत्तर के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन को एक साथ रख पाए. इस साल जनवरी में शांति समझौते पर दस्तख़त के साथ ही सूडान में संघर्ष ख़त्म हुआ था. नेशनल यूनिटी की नयी सरकार में गरांग को उप राष्ट्रपति बनाया गया. शांति समझौते को बड़ी जीत की संज्ञा देते हुए गरांग ने कहा था कि अब जाकर दक्षिण के लोगों का सम्मान हुआ है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि गरांग की मौत के बाद एक बार फिर सूडान में शांति समझौते के भविष्य पर सवाल उठेंगे. |
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