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अमरीका में एक मौलवी को आजीवन क़ैद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में एक मौलवी को आजीवन क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. इस मौलवी ने 11 सितंबर के हमलों के बाद मुसलमानों से अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के समर्थन में जिहाद की अपील की थी. अली अल तिमीमी ने अमरीकी सैनिकों से संघर्ष करने की भी अपील की थी. वर्जीनिया स्थित एलेक्ज़ेंड्रिया की एक अदालत ने अप्रैल में तिमीमी को दोषी ठहराया था. जज लियोनी ब्रिन्केमा ने सज़ा सुनाते हुए बताया कि सबूतों के आधार पर आजीवन क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. 41 वर्षीय मौलवी अली अल तिमीमी ने कहा है कि वे निर्दोष हैं. उनके वकीलों ने पहले यह कहा था कि तिमीमी के ख़िलाफ़ मामला धार्मिक स्वतंत्रता और बोलने की स्वतंत्रता पर हमला है. तिमीमी पर आरोप था कि उन्होंने 11 सितंबर के हमले के कुछ दिनों बाद एक मस्जिद में युवा मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहा था कि वे अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के समर्थन में जिहाद में हिस्सा लें. सरकारी वकीलों ने 16 सितंबर 2001 को मौलवी तिमीमी और उनके अनुयायियों के बीच वॉशिंगटन के निकट हुई बैठक को इस मामले में आधार बनाया था. उन्होंने कहा था कि वे एक ग्रुप में थे जिन्होंने दुनियाभर में जिहाद के प्रशिक्षण के लिए वर्जीनिया जिहाद नेटवर्क बनाया था. बचाव पक्ष के वकीलों का तर्क था कि तिमीमी ने युवा मुसलमानों से सिर्फ़ ये कहा था कि उनके लिए ये देश छोड़ देना ही बेहतर है क्योंकि अमरीका में वे अपने धार्मिक विश्वासों का पालन नहीं कर पाएँगे. सज़ा सुनाए जाने के पहले तिमीमी ने कहा था कि वे अपना दोष नहीं स्वीकार करेंगे और न ही अदालत से दया की अपील करेंगे क्योंकि वे निर्दोष हैं. |
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