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रियायत देने को तैयार नहीं हैं बुश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वो जी आठ देशों के सम्मेलन में लीक से हटकर ऐसा कोई काम नहीं करने वाले हैं जिससे कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को सम्मेलन के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सके. जब एक टीवी साक्षात्कार में उनसे पूछा गया कि इराक़ युद्ध में ब्रिटेन ने अमरीका की मदद की थी, क्या उसके बदले में वो टोनी ब्लेयर की मदद करने वाले हैं तो जॉर्ज बुश ने साफ़ इनकार कर दिया. बुश ने कहा कि वो अपना एजेंडा लेकर जी8 में आ रहे हैं और टोनी ब्लेयर अपनी बात रखेंगे. अमरीकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनके लिए 'राष्ट्रहित' सर्वोपरि है, दोस्ती अपनी जगह है लेकिन उसके लिए वे अमरीकी जनता के हितों से समझौता नहीं करना चाहते हैं. वो स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि ब्रिटेन ने इराक़ के मामले में अमरीका की सहायता अपने हितों को साधने के लिए की और इसीलिए ब्रिटेन को भी ये नहीं सोचना चाहिए कि जी8 सम्मेलन में अमरीका ब्रिटेन के लिए कोई बड़ा त्याग नहीं करने वाला है. लेकिन ये भी सच है कि कुछ हद तक अमरीका ने ब्रिटेन की बात मानी है – चाहे वो अफ़्रीका को दी जाने वाली सहायता राशि दोगुना करने की बात हो, कर्ज़ माफ़ करने को सहमति देना या फिर जलवायु परिवर्तन का मामला. लेकिन क्या ये छोटे-छोटे क़दम जी8 सम्मेलन को सफल बनाने के लिए काफ़ी होंगे? ये एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब आने वाले चार-पाँच दिनों में मिलेगा. मिसाल के तौर पर जलवायु परिवर्तन के मामले को ही लीजिए. इस मुद्दे पर बुश ने भले ही आम तौर पर कड़ा रुख़ अपना रखा हो, लेकिन अमरीका के कुछ राज्यों और शहरों ने इस दिशा में बेहतरी के लिए क़दम उठाना शुरू कर दिया है. उस दृष्टि से देखा जाए तो अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ऐसे मुद्दों पर न केवल जी8 के अपने साथियों से बल्कि अमरीका के लोगों की आम राय के हिसाब से भी अलग-थलग पड़ सकते हैं और इसका प्रभाव उन पर पड़ सकता है. ब्रिटेन चाहता है कि अमरीका ग़रीबी हटाने, धरती के बढ़ते तापमान को कम करने और कर्ज़ माफ़ करने के मामले में बड़े वादे करे लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति के बयान से स्पष्ट हो गया है कि स्कॉटलैंड में इसी सप्ताह होने वाले सम्मेलन में अमरीका ऐसा कुछ नहीं करने जा रहा है. |
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