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भारत में मना था जैक स्ट्रॉ का हनीमून | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बहुत से भारतवासी आजकल हनीमून के लिए यूरोप यात्रा पर आते हैं. लेकिन क्या आपको मालूम है कि ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रा अपने हनीमून के लिए भारत गए थे? और यही नहीं 1978 की इस सुहानी याद का ज़िक्र वो आज भी बड़े प्यार से करते हैं. लंदन के प्रतिष्ठित और प्रभावशाली चैटम हाउस में सोमवार को भारत के भविष्य पर एक महत्वूपर्ण उच्च स्तरीय सम्मेलन शुरू हुआ. इंडिया – द नेक्स्ट डेकेड, भारत का अगला दशक – और इस सम्मेलन के आरंभिक भाषण की शुरूआत ही स्ट्रॉ ने भारत के साथ अपने संबध और अपने ‘हनीमून’ के ज़िक्र से किया. जवाब में अपनी बारी आने पर भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने चुटकी ली. उन्होंने कहा उनके पुराने मित्र जैक को भारत की भविष्य में बढ़ने वाली ताक़त का अंदेशा शायद पहले से ही था. पुरानी घनिष्ठता दोनों नेता भारत की आर्थिक उन्नति और दोनों देशों की समझ का ज़िक्र करते हुए आपस में काफ़ी घनिष्ठ नज़र आए. एक दूसरे को पहले नाम से संबोधित करते हुए भारत और ब्रिटेन के विदेश मंत्री सहजता से आर्थिक विषयों पर बात करते रहे. नटवर सिंह ने कहा कि यह समय भारत ब्रिटेन संबधों का ‘बेस्ट ऑफ़ टाइम्स’ है – यानि बेहतरीन समय है. नटवर सिंह ने माना कि भारत में अब भी ग़रीबी बहुत है और 1.2 अरब की जनसंख्या को संभालना आसान नहीं है लेकिन उनका कहना था कि भारत एक जीवंत, प्रजातंत्र है. नटवर सिंह ने कहा कि भारत विश्व पटल अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है और सारी दुनिया से मिल रहा ध्यान इसका सूचक है. उन्होंने कहा, "भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम जनसंख्या है, दूसरी सबसे बड़ी शिया जनसंख्या है लेकिन इसके बावजूद देश में कोई भी अल क़ायदा या तालेबान सदस्य नहीं है." जैक स्ट्रॉ ने भी भारत की उपलब्धियाँ गिनाईं और ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों के योगदान का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच साझेदारी आने वाले दिनों में और बढ़ेगी. आर्थिक शक्ति इस सम्मलेन में भारत और ब्रिटेन के बड़े आर्थिक विशेषज्ञ, व्यापारी और सरकारी अधिकारी शामिल हुए. 6 प्रतिशत की दर से लगातार बढ़ने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर ब्रिटेन के जाने माने अर्थशास्त्री और फ़ाइनेंशियल टाइम्स अख़बार के सह संपादक मार्टिन वुल्फ़ काफ़ी प्रभावित हैं और मानते हैं कि इसी आर्थिक बल के चलते संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को मज़बूत है. उन्होंने कहा “किसी भी देश को सुरक्षा परिषद में जगह देने के दो ही मूल कारण हो सकते हैं – उसका आकार और जनसंख्या, भारत - इतना बड़ा है कि वो तो कारण हैं ही और दूसरा उसका आर्थिक वज़न जो आधुनिक दुनिया में उसकी शक्ति का कारण है. जैसे-जैसे भारत में विकास हो रहा है उसकी सदस्यता का दावा बढ़ता जा रहा है.” इस सम्मेलन में भाग लेने आए भारत के पूर्व वित्त सलाहकार, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में काम कर चुके और उदारीकरण के प्रबल समर्थक डॉ विजय केलकर ने कहा कि डॉ विजय केलकर ने कहा,"दुनिया की 16 प्रतिशत जनता निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं है. भारत एक दशक के भीतर दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगा, और दशकों तक बढ़ता रहेगा." नटवर सिंह ने इस सम्मेलन में कहा कि आगामी जी 8 बैठक के दौरान और फिर वॉशिंगॉटन की अपनी यात्रा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सुरक्षा परिषद के लिए भारत की दावेदारी के लिए पुरज़ोर कोशिश करेंगे. |
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