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वीटो के बिना सदस्यता का प्रस्ताव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए अभियान चलानेवाले कुछ देशों ने एक प्रस्ताव रखा है जिसमें बिना वीटो के अधिकार के नए सदस्य बनाए जाने का सुझाव दिया गया है. ये प्रस्ताव जर्मनी, जापान, ब्राज़ील और भारत लेकर आए हैं जो सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता दिए जाने की माँग कर रहे हैं. इसमें 15 सदस्यों वाले सुरक्षा परिषद में 10 और नए सदस्यों को जगह देने की बात की गई है. योजना में छह स्थायी और चार अस्थायी सदस्य रखने का प्रस्ताव है. लेकिन इस प्रस्ताव में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि नए स्थायी सदस्यों को 15 वर्ष तक वीटो का अधिकार नहीं देने की बात की गई है. साथ ही कहा गया है कि 15 वर्षों के बाद इस बारे में फिर समीक्षा की जाएगी. उल्लेखनीय है कि नए सदस्यों को वीटो का अधिकार दिए जाने के प्रश्न पर सहमति नहीं बन पा रही थी और इस कारण सुरक्षा परिषद के विस्तार की योजना पर कोई फ़ैसला नहीं हो सका है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हामिद अंसारी ने इस बारे में बीबीसी से कहा,"चारों देशों ने अपना रूख़ थोड़ा बदला है लेकिन प्रस्ताव की असली बात ये है कि सुरक्षा परिषद में सुधार होना चाहिए और सदस्यों की संख्या बढ़नी चाहिए". भविष्य अब चारों देश चाहते हैं कि इस महीने के अंत तक संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव पर मतदान करवाया जाए. यदि प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित हो जाता है तो इसके बाद फिर एक मतदान करवाया जाएगा जिसमें ये तय होगा कि किन देशों को सदस्यता दी जाए. ये तय होने के बाद संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में परिवर्तन करने की ज़रूरत होगी. उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने ये कहते हुए संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में सुधार की बात की है कि संस्था का गठन हुए 60 वर्ष हो चुके हैं और संस्था में समय के हिसाब से बदलाव किया जाना आवश्यक है. |
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