|
ईरान में नए गठबंधन की कोशिश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान में दूसरे दौर के राष्ट्रपति चुनाव के लिए सुधारवादी और थोड़े उदार समझे जाने वाले रुढ़िवादी हाथ मिलाने की सोच रहे हैं. उनका मक़सद है कट्टरपंथी उम्मीदवार और तेहरान के मेयर महमूद अहमदीनेजाद को चुनाव जीतने से रोकना. शुक्रवार को ईरान में हुए राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक मत नहीं मिल पाए थे. इस कारण अब अगले शुक्रवार यानी 24 जून को दूसरे दौर का मतदान होगा. पहले दौर की मतगणना में पहले दो स्थान पर रहे उम्मीदवार ही दूसरे दौर के लिए चुनाव मैदान में उतर पाते हैं. दूसरे दौर में पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशमी रफ़संजानी और तेहरान के मेयर महमूद अहमदीनेजाद के बीच सीधी टक्कर है. पहले दौर में अहमदीनेजाद ने आश्चर्यजनक रूप से दूसरा स्थान हासिल किया. पहले नंबर पर रहे रफ़संजानी. अहमदीनेजाद की अप्रत्याशित सफलता से ईरान के सुधारवादियों को चिंता हो गई है. और तो और थोड़े उदार समझे जाने वाले रुढ़िवादी भी इससे ख़ुश नहीं हैं. समर्थन प्रमुख सुधारवादी पार्टी पार्टिसिपेशन फ़्रंट पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशमी रफ़संजानी को समर्थन देने के मुद्दे पर आपात बैठक कर रही है.
रफ़संजानी के एक प्रवक्ता ने देश के सभी सुधारवादी नेताओं को दूसरे दौर के चुनाव के लिए गठबंधन बनाने का न्यौता दिया है. जानकारों का कहना है कि ईरान के लोगों को इस बात की चिंता है कि अगर दूसरे दौर के चुनाव में कट्टरपंथी उम्मीदवार की विजय होती है तो हाल के दिनों में मिली उनकी सामाजिक स्वतंत्रता पर लगाम लग सकता है. पहले दौर के चुनाव में पिछड़ गए सुधारवादी उम्मीदवार मुस्तफ़ा मोइन के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि तेहरान के मेयर देश की अलोकतांत्रिक शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने कहा कि देश की सभी उदारपंथी शक्तियों को मिलकर एक गठबंधन बनाना चाहिए ताकि कट्टरपंथियों को सत्ता में आने से रोका जा सके. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||