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ईरान में देर तक मतदान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान में नया राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान जारी है. मतदान में बड़ी संख्या में लोगों के भाग लेने की वजह से इसके समय में बढ़ोतरी की गई है. माना जा रहा है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का यह सबसे कड़ा मुक़ाबला है. तेहरान से बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल का कहना है कि समय बढ़ाने की असली वजह यह है कि सरकार चाहती है कि उनकी निर्वाचन व्यवस्था को वैधता मिले. दूसरी ओर, अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने राष्ट्रपति चुनाव की आलोचना की है. राष्ट्रपति बुश का कहना है कि ईरान लोकतंत्र की मांग की अनदेखी कर रहा है. व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में राष्ट्रपति बुश ने कहा, "ईरान में उन लोगों का शासन है जो अपने घर में स्वतंत्रता का दमन करते हैं और दुनिया भर में आतंक फैलाते हैं." ईरान में राष्ट्रपति पद की दौड़ में सबसे आगे हैं पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशमी रफ़संजानी. जानकारों का ये भी कहना है कि हो सकता है रफ़संजानी को पहले दौर में आवश्यक मत नहीं मिल पाए. ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए 50 प्रतिशत से ज़्यादा मत मिलने आवश्यक हैं और अगर पहले दौर के चुनाव में इतने मत किसी को नहीं मिलते तभी दूसरे दौर के चुनाव होते हैं. तेहरान स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मतदान में कितने लोग हिस्सा लेते हैं इस पर सबकी नज़र है क्योंकि अगर कम संख्या में लोग मतदान के लिए आए तो इसे ईरान की इस्लामी व्यवस्था की हार मानी जाएगी. टक्कर ईरान में राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च नहीं होता और देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली ख़ामनेई के पास राष्ट्रपति से ज़्यादा अधिकार होते हैं और सभी राजनीतिक मामलों में उनका निर्णय आख़िरी होता है.
ईरानी मतदाता सुधारवादी राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी का उत्तराधिकारी चुन रहे हैं. 1997 में सुधारवादी नेता ख़ातमी को राष्ट्रपति चुनाव में ज़बरदस्त जीत मिली थी. वे क़ानूनी रोक के कारण चुनाव में फिर से खड़े नहीं हुए हैं. राष्ट्रपति पद के लिए खड़े हुए सात उम्मीदवारों में सुधारवादी और रुढ़िवादी दोनों तरह के लोग शामिल हैं. 1989 से 97 तक राष्ट्रपति रहे रफ़संजानी दौड़ में सबसे आगे हैं क्योंकि उन्हें दोनों पक्षों का समर्थन मिलने की उम्मीद है. रफ़संजानी को पूर्व कट्टरपंथी पुलिस प्रमुख मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ और सुधारवादी मुस्तफ़ा मोईन से अच्छी टक्कर मिल रही है. अगर पहले दौर के मतदान में किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से ज़्यादा वोट नहीं मिले तो दूसरे दौर का मतदान एक जुलाई को होगा. |
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