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गुरुवार, 26 मई, 2005 को 04:33 GMT तक के समाचार
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क़ुरान के अपमान पर रिपोर्ट
ग्वांतानामो बे
ग्वांतानामो बे शिविर शुरू से आरोपों के घेरे में रहा है
ग्वांतानामो बे की जेल में कुरान के अपमान के मामले पर अमरीकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अब से तीन वर्ष पहले एक क़ैदी ने ऐसी शिकायत की थी.

मानवाधिकार संगठनों की माँग पर जारी की गई एफ़बीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ ग्वांतानामो बे एक क़ैदी ने आरोप लगाया था कि अमरीकी सैनिकों ने कुरान की एक प्रति को टॉयलेट में बहा दिया था.

अमरीकी समाचार पत्रिका 'न्यूज़वीक' में ऐसी ख़बर छपी थी जिसके बाद काफ़ी हंगामा मचा था और पत्रिका ने अपनी ख़बर को वापस ले लिया था.

'न्यूज़वीक' में समाचार छपने के बाद दुनिया भर में क्रुद्ध प्रदर्शन हुए, अफ़ग़ानिस्तान में हुए प्रदर्शनों में हुई हिंसा में 15 लोगों की मौत हो गई.

पिछले सप्ताह अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन ने कहा था कि कुरान को टॉयलेट में बहाए जाने के मामले में 'कोई विश्वसनीय और ठोस आरोप' नहीं है.

 गार्ड उनके साथ बुरा सलूक करते हैं, पाँच महीने पहले गार्डों ने कैदियों की पिटाई की थी और कुरान को टॉयलेट में बहा दिया था
एफ़बीआई की रिपोर्ट के अंश

व्हाइट हाउस ने कहा कि 'न्यूज़वीक' की रिपोर्ट ने मुस्लिम जगत में अमरीकी छवि को भारी नुक़सान पहुँचाया है लेकिन अब एफ़बीआई की रिपोर्ट में क़ैदी की शिकायत की बात सामने आने से अमरीकी प्रशासन के लिए नई दिक़्कतें पैदा हो गई हैं.

एक क़ैदी से बात करने के बाद एफ़बीआई के एक एजेंट ने 1 अगस्त 2002 को अपनी रिपोर्ट में लिखा, "उनका कहना है कि गार्ड उनके साथ बुरा सलूक करते हैं, पाँच महीने पहले गार्डों ने कैदियों की पिटाई की थी और कुरान को टॉयलेट में बहा दिया था."

इसी रिपोर्ट में लिखा गया है कि "जब क़ैदी नमाज़ पढ़ते हैं तो गार्ड उन्हें परेशान करने के लिए उनके आसपास नाचते हैं, गार्ड अब भी ऐसी हरकतें कर रहे हैं."

रिपोर्ट

एफ़बीआई की यह रिपोर्ट अमरीका की मानवाधिकार संस्था अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) की माँग पर जारी की गई है, एसीएलयू का कहना है कि रिपोर्ट से पता चलता है कि पेंटागॉन को इस बात की जानकारी थी कि ऐसी शिकायत की गई है लेकिन उन्होंने मामले को नज़रअंदाज़ कर दिया.

 दुर्भाग्यवश हमने कई बार यह देखा है कि ग्वांतानामो बे या दूसरी जेलों के क़ैदियों के बयान अमरीकी सरकार के बयान के मुक़ाबले अधिक विश्वसनीय साबित हुए हैं
एयूसीएल के वकील

अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने एसीएलयू को दी गई रिपोर्ट के बारे में तत्काल कोई टिप्पणी तो नहीं की है लेकिन उनका कहना है कि पहले भी क़ैदियों के ऐसे आरोप ग़लत साबित हुए हैं.

एसीएलयू के वकील जमील जाफ़र कहते हैं, "दुर्भाग्यवश हमने कई बार यह देखा है कि ग्वांतानामो बे या दूसरी जेलों के क़ैदियों के बयान अमरीकी सरकार के बयान के मुक़ाबले अधिक विश्वसनीय साबित हुए हैं."

एफ़बीआई के दूसरी रिपोर्टों में भी कई संगीन आरोप क़ैदियों ने लगाए हैं, एक क़ैदी का तो कहना है कि एक महिला गार्ड ने अपने मासिक स्राव का रक्त उनके चेहरे पर पोत दिया था.

इस बीच अमरीका की एक प्रमुख मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ग्वांतानामो शिविर को बंद करने की माँग करते हुए उन्हें 'याताना शिविर' बताया है.

ग्वांतानामो बे में इस समय लगभग पाँच सौ क़ैदी हैं जिन्हें अल क़ायदा से संबंध होने के आरोप में क़ैद में रखा गया है, ग्वांतानामो बे क्यूबा में अमरीकी नौसेना का अड्डा है जहाँ अमरीकी नागरिक क़ानून लागू नहीं होते.

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