| तेल बिक्री: सरकार की कड़ी आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली एक संस्था ने इराक़ी तेल की बिक्री से प्राप्त होने वाले राजस्व के प्रबंधन पर इराक़ी सरकार की कड़ी आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरीक्षण बोर्ड का कहना है कि इराक़ी मंत्रालयों के आर्थिक नियंत्रण और इसकी प्रक्रिया में कमियाँ हैं. ये भी कहा गया है कि ठेके देने में पारदर्शिता नहीं होती और ये भी सुनिश्चित नहीं किया जाता कि ठेके पूरे हों. इराक़ युद्ध के बाद अमरीकी प्रशासन की व्यवस्था की भी इसी तरह की आलोचना की गई थी. ये रिपोर्ट इराक़ में सत्ता के हस्तांतरण के बाद के समय की है. रिपोर्ट में ये भी आरोप लगाया गया है कि कई बार तो तेल की तस्करी होती है और ये तेल बेचा ही नहीं जाता. इराक़ की 'सदर्न ऑयल कंपनी' के अध्यक्ष ने माना है कि इराक़ युद्ध से पहले जितना तेल निकाला जा रहा था उसके मुकाबले में अब कम तेल निकाला जा रहा है. उन्होंने बीबीसी को बताया कि ये इसलिए हुआ है क्योंकि उपकरण आदि को ठीक-ठाक रखने के लिए पर्याप्त धन-राशि उपलब्ध नहीं है. |
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