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अन्नान ने 'छूट' का विरोध किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने अमरीकी शांति सैनिकों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक मुकदमों से छूट देने के सुरक्षा परिषद प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है. अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की सदस्यता नहीं ली है और वह सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित करवाकर इससे छूट लेता रहा है. अब तीसरी बार अमरीका कह रहा है कि इन सभी देशों के लिए यह छूट एक साल बढ़ा देनी चाहिए जो इस अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में शामिल नहीं हुए हैं. अमरीका का तर्क है कि राजनीतिक कारणों से इसका दुरुपयोग हो सकता है. दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अमरीकी सैनिकों ने जिस तरह इराक़ में क़ैदियों के साथ दुर्वव्यवहार किया है उसके बाद छूट मांगने का अमरीकी प्रयास अव्यवहारिक है. साख़ पर असर संयुक्त राष्ट्र से बीबीसी संवाददाता सुज़ाना प्राइस का कहना है कि कोफ़ी अन्नान अमरीकी शांति-सैनिकों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय से बचाने के ख़िलाफ़ खुलकर बोले. उन्होंने कहा कि इराक़ में क़ैदियों के साथ जिस तरह का दुर्वव्यहार हुआ है उसके बाद यह छूट दुर्भाग्यपूर्ण ही होगी. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अमरीका को एक बार और छूट देने से सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र की साख़ पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय उन युद्ध अपराधों पर कार्रवाई कर सकता है जिन पर कोई देश कार्रवाई नहीं कर पा रहा है या नहीं करना चाहता. दूसरी ओर अमरीका का कहना है कि न्यायालय, जिसने पिछले साल ही काम करना शुरु किया है, अभी राजनीति से प्रेरित मामलों की जाँच नहीं कर सकता. जबकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अमरीका को यह साबित करना चाहिए कि वह अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना चाहता है. हालांकि अमरीका कह रहा है कि वह इराक़ में क़ैदियों के साथ बदसलूकी करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा. छूट का यह प्रस्ताव अमरीका ने पिछले महीने रखा था लेकिन इस पर चर्चा इसलिए रोक दी गई थी क्योंकि वह इराक़ के प्रस्ताव पर पहले चर्चा करना चाहता था. कूटनीतिकों का कहना है कि अमरीका को यह प्रस्ताव पारित करने के लिए आवश्यक नौ वोट जुटाने में दिक्कत हो सकती है. |
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