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'क़ुरान संबंधित ख़बर 'ग़लत' थी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी पत्रिका 'न्यूज़वीक' का कहना है कि मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ क़ुरान के बारे में उसकी अमरीकी सैनिक जाँच की ख़बर 'ग़लत' थी. 'न्यूज़वीक' ने पहले ख़बर छापी थी कि एक अमरीकी सैनिक जाँच से पुष्ट हुआ है कि ग्वांतानामो बे सैनिक अड्डे में क़ैदियों से पूछताछ करने वाले अधिकारियों ने पवित्र क़ुरान का अपमान किया. इसके बाद अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद और अन्य शहरों में और पाकिस्तान में भी उग्र प्रदर्शन हुए थे. अफ़ग़ानिस्तान में हुए प्रदर्शनों के दोरान हिंसा भड़कने से कम से कम 15 लोग मारे गए थे. महत्वपूर्ण है कि अमरीकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने कहा है कि वह संतुष्ट है कि ग्वांतानामों बे में क़ैद काट चुके लोगों के इस बारे में लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है.
'न्यूवीक' के संपादक ने ताज़ा संस्करण में कहा है कि उनके मूल सूत्र को पक्का पता नहीं है कि कब ये कहा गया कि पवित्र क़ुरान की एक प्रति को तो शोचालय में रखा गया. पत्रिका ने ग़लती पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों के साथ सहानुभूति व्यक्त की है. न्यूज़वीक में यह रिपोर्ट छपने के बाद पाकिस्तान ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की थी. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा था कि अगर ग्वांतानामो सैनिक अड्डे पर अमरीकी सैनिकों ने क़ुरान का अपमान किया है, तो उन्हें कड़ा दंड दिया जाना चाहिए. छह धार्मिक पार्टियों के गठबंधन मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) ने अमरीका से कहा था कि वह इस मामले में बिना शर्त माफ़ी मांगे अन्यथा उसके ख़िलाफ़ और प्रदर्शन होंगे. दूसरी ओर अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने मुसलमानों से अपील की थी कि वे शांति से काम करें और वादा किया कि अमरीका इस मामले की जाँच कर रहा है. उन्होंने कहा था कि इस्लाम का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता. |
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