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गुरुवार, 05 मई, 2005 को 16:08 GMT तक के समाचार
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ऐसे पकड़ा गया अबू फराज लिब्बी को
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मर्दान के इस घर में छिपे थे लिब्बी
अल क़ायदा के प्रमुख नेता अबू फराज अल लिब्बी को किस तरह पकड़ा गया इसके बारे में दिलचस्प जानकारियाँ सामने आई हैं, पूरी कार्रवाई किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है.

पाकिस्तान के ख़ुफ़िया एजेंट काफ़ी समय से लिब्बी के पीछे लगे हुए थे और पेशावर से 60 किलोमीटर दूर मर्दान शहर में आख़िर उन्हें पकड़ ही लिया गया.

पाकिस्तान सरकार इस गिरफ़्तारी के मामले में बहुत ही सतर्क रवैया अपना रही है, यह तक नहीं बताया गया कि गिरफ़्तारी कहाँ हुई है, लेकिन बीबीसी को पुलिस अधिकारियों के हवाले से जानकारियाँ मिल रही हैं.

ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी के पेशावर स्थित संवाददाता हारून रशीद को बताया कि लिब्बी एक मोटरसाइकिल पर जा रहे थे और एजेंट उनका पीछा कर रहे थे तभी वे एक घर में जा घुसे.

 बुर्क़ा पहने आईएसआई के एजेंटों ने बाहर खिड़की के शीशे तोड़ डाले और खिड़की से आँसू गैस के गोले फेंके, थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति हाथ उठाए बाहर निकला जिसे ये लोग अपने साथ किसी अनजान जगह पर ले गए
पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी

उनका पीछा करते हुए आईएसआई के एजेंटों ने गोलियाँ चलाईं जो उन्हें नहीं लगीं, पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के एजेंट बुर्क़ा पहनकर लिब्बी का पीछा कर रहे थे ताकि उन्हें शक न हो जाए.

पुलिस के मुताबिक़ लिब्बी जब घर में जा घुसे तो इन एजेंटों ने आँसू गैस का गोला छोड़ा और लिब्बी को धर दबोचा, जब उन्हें पकड़ा गया तो उनके पास से कोई हथियार नहीं मिला.

मर्दान के डीएसपी अमानुल्लाह ख़ान ने बताया, "बुर्क़ा पहने आईएसआई के एजेंटों ने बाहर खिड़की के शीशे तोड़ डाले और खिड़की से आँसू गैस के गोले फेंके, थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति हाथ उठाए बाहर निकला जिसे ये लोग अपने साथ किसी अनजान जगह पर ले गए."

अमानुल्लाह ख़ान ने कहा कि यह पूरी तरह से केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी का अभियान था और स्थानीय पुलिस को इसके बारे में कोई सूचना नहीं थी.

उन्होंने बताया, "पुलिस लिब्बी से कोई बातचीत करती इससे पहले फटाफट उनकी तलाशी ली गई और एक गाड़ी में बिठाकर ले जाया गया."

लिब्बी की तलाशी में उनके पास के कुछ कागज़ और एक मोबाइल फ़ोन मिला, उस पर किसके नंबर लिखे थे यह पुलिस अधिकारियों को मालूम नहीं हो सका लेकिन उनके पास कोई हथियार नहीं था.

अब पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा है कि लिब्बी को फ़िलहाल अमरीका को सौंपे जाने की कोई योजना नहीं है, अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अगर अमरीका को सौंपा भी गया तो गहन पूछताछ के बाद ही सौंपा जाएगा.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने लिब्बी की गिरफ़्तारी को आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में एक अहम जीत बताया है.

पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने इस गिरफ़्तारी के बारे में बताया, "ख़ुफ़िया अधिकारी काफ़ी समय से सुराग़ इक्ट्ठा कर रहे थे, वे सही दिशा में काम कर रहे थे इसलिए उन्हें सफलता मिली."

पाकिस्तान ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर हमला करने के ज़िम्मेदार माने जाने वाले लिब्बी की गिरफ़्तारी पर दो करोड़ रूपए का इनाम रखा था.

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