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'अल क़ायदा पर प्रतिबंध असरदार नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने कहा है कि चरमपंथी संगठनों अल क़ायदा और तालेबान पर लगाए गए प्रतिबंध से उनकी गतिविधियों पर बहुत कम फ़र्क पड़ा है. इस समिति के जाँचकर्ताओं ने कहा है कि किसी भी राज्य ने ओसामा बिन लादेन से जुड़े किसी व्यक्ति के हथियार ख़रीदने पर प्रतिबंध नहीं लगाया. रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि अल क़ायदा की संपत्ति ज़ब्त कर ली गई है लेकिन लेकिन यह कहना मुश्किल है कि इसका कितना असर हुआ. रिपोर्ट पर सोमवार को चर्चा होने की संभावना है. जाँचकर्ताओं ने कहा है कि अल क़ायदा ने ज़्यादातर हमलों में ऐसे हथियारों का उपयोग किया जिन पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था. हमलों के लिए खर्च इस रिपोर्ट में मार्च में मैड्रिड में किए गए ट्रेन विस्फोटों का ज़िक्र किया गया है. इस विस्फोट में दो सौ लोग मारे गए थे. रिपोर्ट के अनुसार इस विस्फोट के लिए स्थानीय बाजार में उपलब्ध विस्फोटकों का उपयोग किया गया था जो खदानों में काम में आता है और मोबाइल फ़ोन के ज़रिए विस्फोट किया गया था.
संयुक्त राष्ट्र की इस समिति का कहना है कि 11 सितंबर 2001 को अमरीका में किए गए हमले के बाद से किसी भी हमले में 50 हज़ार डॉलर (यानी कोई 25 लाख रुपए) से अधिक का खर्च नहीं किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 सितंबर के हमलों में ही छह अंकों की राशि खर्च की गई थी. समिति का मानना है कि इस बात की कोई संभावना नहीं दिखती कि आने वाले दिनों में अल क़ायदा और इससे संबंधित संगठनों के हमले बंद होंगे. संयुक्त राष्ट्र की समिति का कहना है कि अल क़ायदा रासायनिक और जैविक हथियार पाने की भी कोशिश कर रहा है. समिति के अनुसार उनकी कोशिश ऐसे बम हासिल करने की भी है जिसमें रेडियोएक्टिव सामग्री का उपयोग किया गया हो. समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रभावशाली क़दम उठाने की बात कही है. |
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