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ग्वांतानामो में पत्रकारों के सामने सुनवाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सेना ने कहा है कि पत्रकारों को दूसरे दिन भी ग्वांतानामो बे में रखे गए लगभग 600 संदिग्ध चरमपंथियों की सुनवाई देखने दिया जाएगा. क्यूबा स्थित ग्वांतानामो बे में गुरूवार को पहली बार पत्रकारों को वहाँ चल रहे मुक़दमे को देखने की अनुमति दी गई थी. पहले दिन पत्रकारों ने दो अफ़ग़ान बंदियों का मुक़दमा देखा जिन्होंने अपनी रिहाई के लिए जिरह की. ग्वांतामो बे में क़ैद लोग वहाँ पिछले दो साल से बंद हैं और ना तो उनपर कोई मुक़दमा चलाया गया है ना ही उन्हें कोई वकील रखने दिया गया है. कुछ तबक़े मौजूदा सुनवाई का भी विरोध कर रहे हैं और इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि बंदियों को अभी भी वकील नहीं रखने दिया जा रहा. मगर अमरीका ने कार्यवाही को पूरी तरह से सही और न्यायसंगत बताते हुए कहा है कि कैदियों के 'व्यक्तिगत प्रतिनिधि' उनकी तरफ़ से बात कर रहे हैं. न्यायाधिकरण अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों ये फ़ैसला सुनाया था कि इन बंदियों को अपनी गिरफ़्तारी को चुनौती देने का अधिकार है जिसके बाद उनकी सुनवाई के लिए पिछले शुक्रवार को न्यायाधिकरण बनाए गए. हालाँकि सबसे पहले जिन 10 बंदियों की सुनवाई होनी है उनमें पाँच ने विरोध जताने के लिए सुनवाई में हिस्सा लेने से मना कर दिया है. अमरीकी अधिकारियों ने कहा है कि उनके व्यक्तिगत तौर पर न्यायाधिकरण में उपस्थित नहीं होने के बावजूद उनके मामले की सुनवाई होगी. अधिकारियों ने बताया है कि मुक़दमों के शुरूआती फ़ैसले अगले सप्ताह तक आएँगे. सुनवाई
गुरूवार को हथकड़ी और ज़ंजीरों में अदालत में लाए गए दोनों अफ़ग़ान बंदियों ने कहा कि वे तालेबान से जुड़े ज़रूर थे मगर उन्होंने कभी अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ लड़ाई नहीं की. बंदियों ने अपने गवाह बुलाने के लिए आग्रह किया मगर उसे नहीं माना गया. एक भीड़ भरे छोटे से कमरे में हो रही सुनवाई के दौरान बीबीसी के संवाददाता निक चाइल्ड्स भी मौजूद थे, उन्होंने बताया, "उसके हाथ-पैर हथकड़ी-बेड़ी में जकड़े थे और वह 31 वर्षीय अफ़ग़ान था, उसने नारंगी रंग के क़ैदियों की पोशाक पहन रखी थी." उस क़ैदी के ख़िलाफ़ आरोप पढ़कर सुनाए गए कि वह एक तालेबान सैनिक है जिसके पास हथियार था और वह कुंदूज़ शहर में उत्तरी गठबंधन के विरूद्ध लड़ रहा था, उसे तालेबान के एक नेता के साथ ही पकड़ा गया था. एक दुभाषिए की मदद से इस व्यक्ति ने सैनिक अदालत को बताया कि वह सैनिक नहीं है और तालेबान ने हथियार तो हर किसी को दिए थे. उस व्यक्ति ने कहा, "मैने तो यह सोचकर आत्मसमर्पण किया कि अमरीका मानवाधिकार का समर्थन करता है, मैंने नहीं सुना था कि अमरीका ने किसी के साथ बुरा बर्ताव किया हो." इस क़ैदी ने जानना चाहा कि उसके मुक़दमे का फ़ैसला कब होगा और क्या उसे स्वदेश लौटने दिया जाएगा. सुनवाई करीब आधे घंटे तक चली. इसके बाद गुप्त सूचनाएँ और गोपनीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पत्रकारों को वहाँ से हटा दिया गया. |
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