|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जज ने ग्वांतानामो पर अमरीका को लताड़ा
ब्रिटेन के सबसे वरिष्ठ जजों में से एक लॉर्ड स्टीन ने ग्वांतानामो बे की स्थिति पर अमरीका की कड़ी आलोचना की है. अमरीका ने यहाँ कैंप डेल्टा में संदिग्ध 'आतंकवादियों' को क़ैद कर रखा है. एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में लॉर्ड स्टीन ने कहा कि कैंप डेल्टा में क़ानून नाम की कोई चीज़ नहीं है. उन्होंने अमरीका पर न्याय व्यवस्था के प्रति नाकामी का भी आरोप लगाया और ब्रिटेन के मंत्रियों को चुनौती दी कि वे वहाँ क़ैदियों को बंदी बनाकर रखे जाने के ख़िलाफ़ सामने आएँ. यह शायद पहला मौक़ा है जब ब्रिटेन का कोई जज ऐसे विवादित राजनीतिक मुद्दों पर खुल कर बोला हो और एक विदेशी सरकार की आलोचना कर रहा हो. क़ानून नहीं लॉर्ड स्टीन ने कहा, "कैंप डेल्टा में रखे गए बंदियों पर कोई क़ानून लागू नहीं, उन्हें न तो किसी तरह की सुरक्षा है और वे सिर्फ़ अमरीका की दया पर जी रहे हैं." दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने खुलासा किया है कि अमरीका इस पर सहमत हो गया है कि उसके दो नागरिकों को अब मौत की सज़ा नहीं दी जाएगी, लेकिन उन पर सैनिक अदालत में मुक़दमा चलाया जा सकता है.
ब्रिटेन के अधिकारियों का कहना है कि कैंप डेल्टा में बंद उसके दो नागरिकों के बारे में अमरीका के साथ उसकी बातचीत चल रही है और उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वैसे वहाँ ब्रिटेन के नौ नागरिक क़ैद हैं. लॉर्ड स्टीन का कहना है कि इन नौ ब्रिटिश नागरिकों पर सरकार की बातचीत नाकाम रही है हालाँकि उन्हें मौत की सज़ा न दिए जाने पर सहमति हो गई थी. उन्होंने ब्रिटेन के मंत्रियों से अपील की कि वे ग्वांतानामो बे में क़ैद क़रीब 660 बंदियों के बारे में सार्वजनिक रूप से अमरीका की आलोचना करें. वहाँ की स्थिति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए लॉर्ड स्टीन ने कहा,"वहाँ उन्हें कोई क़ानून क़ैदियों से ज़बरदस्ती अपना गुनाह क़बूल करवाने के लिए शक्ति का इस्तेमाल करने से नहीं रोकती और क़ैदियों के पास तो कोई अधिकार ही नहीं." उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या वहाँ के क़ैदियों के लिए न्याय व्यवस्था इतनी है जो उन्हें न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत निष्पक्ष न्याय दिला सके. लॉर्ड स्टीन ने साफ़ साफ़ शब्दों में कहा कि इसका जवाब 'नहीं' है. समझौता जानकारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया और अमरीका में हुआ समझौता भविष्य में ब्रिटेन के साथ होने वाले समझौते के लिए आदर्श हो सकता है.
ऑस्ट्रेलिया की सरकार का कहना है कि उसका क़ानून संदिग्ध लोगों को इसकी अनुमति नहीं देता कि उन पर ऑस्ट्रेलिया में दोबारा मुक़दमा चले. लेकिन बीबीसी के विदेशी मामलों के संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि अगर ऐसे लोगों को दोषी ठहरा दिया जाता है, तो इसकी ज़्यादा संभावना है कि उन्हें अपने देश में सज़ा काटने की अनुमति दी जा सकती है. अभी तक अमरीकी अदालतों का कहना है कि ग्वांतानामो में बंद क़ैदी उसकी न्याय व्यवस्था के दायरे में नहीं आते, क्योंकि वह अमरीका में नहीं है. लेकिन अमरीका के सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होगी. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||