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क़ैदियों के हक़ में उठी आवाज़
अमरीका के पूर्व न्यायाधीशों, कूटनीतिज्ञों और सैनिक अधिकारियों ने देश के सर्वोच्च न्यायलय से अनुरोध किया है कि वह ग्वांतानामो बे सैनिक अड्डे में रखे गए कैदियों के मामले पर विचार करे. उनका कहना है कि इन कैदियों को जिस तरह बिना मुक़द्दमा चलाए और वकीलों की सहायता से वंचित रखा गया है, सर्वोच्च न्यायालय को उसकी क़ानूनी वैधता को परखना चाहिए. ग्वांतानामो बे में लगभग छह सौ लोग दो साल से कैद हैं. उनका तर्क है कि निचली अदालतों के इन लोगों की याचिकाओं को ख़ारिज करने वाले फ़ैसले अनुचित थे. सर्वोच्च न्यायालय को अनुरोध करने वाला ये गुट सोलह कैदियों की अपील का भी समर्थन कर रहे हैं जिन पर अल क़ायदा और तालेबाल के सदस्य होने का आरोप है. अमरीका इन्हें युद्धबंदी नहीं मानता और इन्हें ऐसे दुश्मन बताता है जिन्हें युद्धबंदियों को दिए जाने वाले अधिकार नहीं दिए जा सकते. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों को कैद करने के विशेष कारण हैं और समय आने पर उनपर क़ानून के तहत मुकद्दमा चलाया जाएगा. इस रवैए की अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने काफ़ी आलोचना की है. इस मामले में एक सेवानिवृत एडमिरल डोनल्ड गुटर का कहना था, "अमरीका की सरकार ने ख़ुद को क़ानून से ऊपर रख लिया है. इससे एक बुरी मिसाल कायम हुई है जो भावी लड़ाइयों में अमरीकी सैनिकों के हित में नहीं होगी." |
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